पाली। शहर की फैक्ट्रियों का रंगीन पानी ट्रीट करने के लिए स्थापित ट्रीटमेंट प्लांट में निर्धारित मानक पर पानी ट्रीट नहीं होने के बाद सीईटीपी ने अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की लैब मेंं लगातार प्लांटों की सैंपल रिपोर्ट फेल होने पर अब इनका संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। इसके लिए शुक्रवार को टेंडर इश्यू कर देश भर की कंपनियों को बुलाया है। इन कंपनियों को टेंडर कॉपी देने की तारीख 30 सितंबर तय की है। इसके बाद न्यूनतम दर पर पानी ट्रीट करने वाली कंपनी से नेगोशिएशन कर उसे ठेका दे दिया जाएगा। शहर के उद्योग जगत में यह पहली बार हो रहा है कि प्लांटों के ठेके में कलर-केमिकल भी ठेकेदार कंपनी के माथे पर डाला गया है। सीईटीपी मात्र बिजली जेनरेटर ही उपलब्ध करवाएगी। दावा किया जा रहा है कि दीपावली के बाद शहर के चारों प्लांटों का संचालन किसी कंपनी को ठेके पर दे दिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार शहर की करीब 600 रंगाई-छपाई से निकलने वाले रंगीन पानी को ट्रीट करने के लिए सीईटीपी ने 4 ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखे हैं। साथ ही दो नए ट्रीटमेंट प्लांटों का निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इन प्लांटों का संचालन फिलहाल उद्यमियों की अगुवाई में बने हुए पाली जल प्रदूषण नियंत्रण परिशोधन एवं अनुसंधान फाउंडेशन (सीईटीपी) ही कर रही हैं। प्लांटों के संचालन के लिए लंबा-चौड़ा स्टाफ तथा तकनीकी जानकारों की टीम होने के बाद भी ट्रीटमेंट प्लांट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से तय की गई गाइडलाइन का पालन करने में पूरी तरह से असफल हो रहे हैं। पिछले दस साल की प्लांटों की रिपोर्ट पर नजर डालें तो एक भी रिपोर्ट में यह प्लांट राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की तरफ से निर्धारित गाइडलाइन के अनुरूप पानी ट्रीट नहीं कर पा रहे हैं। इधर, हाल ही में जारी की गई बोर्ड की रिपोर्ट में भी इन चारों प्लांटों को फेल बताया गया है। लगातार रही ऐसी रिपोर्ट को देखते हुए सीईटीपी ने पहले अप्रैल में ही प्लांटों को ठेके पर देने का निर्णय ले लिया था, मगर इस पर सहमति नहीं बन पाई थी।
अबसीईटीपी ने बोर्ड की नई रिपोर्ट काे देखते हुए इसका संचालन ठेके पर देने की तैयारी कर ली है। इसके लिए टेंडर इश्यू भी कर दिए हैं। कलेक्टरकी मौजूदगी में कंपनियां देंगी प्रजेंटेशन : कलेक्टरकी मौजूदगी में 25 कंपनियों से प्रजेंटेशन लेने के बाद इन कंपनियों में से कुछ कंपनियों को चयनित किया जाएगा। इस कंपनियों से सीईटीपी एमओयू करने से पहले पानी को ट्रीट करने के लिए आने वाले खर्च को लेकर भी देखेगी कि यह कहीं महंगा तो नहीं पड़ रहा है। साथ ही एक कंपनी का सलेक्ट करने से पहले इन कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर नेगोशिएशन भी किया जाएगा। इसके बाद ठेका देने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। सीईटीपी का कहना है कि ठेके की पूरी प्रक्रिया दीपावली से पहले ही पूरी करने की तैयारी है। इसके बाद एक कंपनी के नाम पर ठेका जारी कर दिया जाएगा।
सीईटीपी यह ही करेगी
- प्लांटोंठेकेदार के कामकाज पर नियमित निगरानी।
- बिजली-पेयजल जेनरेटर की व्यवस्था।
- नियमित सीईटीपी की लैब में ट्रीट अनट्रीट पानी की सैंपलिंग।
- हर महीने की 10 तारीख तक 75 प्रतिशत कंपनी को भुगतान।
- शेष 25 प्रतिशत राशि का भुगतान प्रदूषण बोर्ड की सैंपल रिपोर्ट के बाद।
- केमिकल की गुणवत्ता को नियमित रूप से जांचना।
- सैंपल रिपोर्ट फेल आते ही संबंधित एजेंसी का ठेका निरस्त करने की कार्रवाई।
ठेकेदार की होगी यह जिम्मेदारी
- फैक्ट्रियों के रंगीन पानी को निर्धारित मानक पर ट्रीट करके देना।
- टेक्निकल अन्य स्टाफ ठेकेदार कंपनी का ही होगा।
- कर्मचारी का पीएफ, ग्रेच्युटी समेत अन्य सुविधाएं भी ठेकेदार की।
- दो दिन से ज्यादा प्लांट बंद नहीं रखे जा सकेंगे।
- ट्रस्ट की शर्तें लागू होगी, सेफ्टी ठेकेदार को करनी होगी।
- मेंटिनेंस छोटे-मोटे टेक्निकल फॉल्ट भी ठेकेदार को दुरुस्त कराने होंगे।
- कलर-केमिकल्स अन्य रसायन भी कंपनी को ही लाना खरीदना होगा।
टेंडर कॉपी 50 हजार की, 20 कंपनियों के आने की उम्मीद : शहर के चारों ट्रीटमेंट प्लांटों का संचालन करने के लिए जारी किए गए टेंडर कॉपी खरीदने की दर 50 हजार रुपए प्रति कॉपी रखी गई है। यह राशि नॉन रिफंडेबल होगी। सीईटीपी को आशा है कि 8-9 कंपनियों के प्रतिनिधि टेंडर जारी करने से पहले ही यहां पर आकर चारों प्लांटों का अवलोकन कर चुके हैं। इसके चलते माना जा रहा है कि करीब 20 से अधिक कंपनियों के प्रतिनिधि टेंडर कॉपी खरीद सकते हैं। इसके साथ ही टेंडर जमा कराने के लिए 5 लाख रुपए की राशि भी टेंडर के साथ जमा करानी होगी।
प्री-बीड के बाद एक कंपनी को सुपुर्द कर देंगे प्लांट
'' सीईटीपीने ट्रीटमेंट प्लांटों के सफल संचालन तथा पानी का ट्रीटमेंट निर्धारित मानकों पर करने के लिए किसी एक्सपर्ट कंपनी को देने की तैयारी कर ली है। इसके लिए टेंडर इश्यू कर दिए हैं। 30 सितंबर तक टेंडर कॉपी खरीदी जा सकती है। प्रति कॉपी की दर 50 हजार रुपए रखी है। टेंडर जमा कराने पर 5 लाख रुपए की राशि भी जमा करानी होगी। 7 से 10 अक्टूबर को कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ प्री-बीड होगी। इसके बाद किसी एक कंपनी के नाम टेंडर जारी कर उसे चारों प्लांट सुपुर्द कर दिए जाएंगे। -अनिल मेहता, अध्यक्षसीईटीपी, विनय बंब, सचिव, सीईटीपी
सीईटीपी को यह होगा फायदा : निजीकंपनी को संचालन की जिम्मेदारी देने से सीईटीपी निर्धारित मानक पर पानी के ट्रीट नहीं होने पर उससे जवाब तलब कर सकेगा। साथ ही सीईटीपी की तरफ से कंपनियों को आमंत्रण पत्र में यह भी कहा कि कंपनी का ही पूरा दायित्व होगा कि सैंपल फेल होने पर उनके खिलाफ ही कार्रवाई करेगी। ट्रीटमेंट प्लांटों से ट्रीट होने के बाद सैंपल निर्धारित मानक पर खरा नहीं उतरने के कारण सीईटीपी को हर वक्त जिला प्रशासन, किसान प्रतिनिधियों समेत अन्य संस्थाओं का निशाना बनना पड़ रहा था। इसके चलते निजी कंपनी को संचालन की जिम्मेदारी देने से सीईटीपी को ज्यादा माथापच्ची नहीं करनी पड़ेगी।
ट्रीट होेने के बाद भी प्लांट उगल रहे जहरीला पानी : गत दिनों जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल, जल संसाधन विभाग, जलदाय विभाग तथा कृषि विभाग की रिपोर्ट में इस पानी को जहरीला तथा जानवरों के पीने पर उनका गर्भपात होना तक माना गया था। सुनवाई के दौरान यह भी तथ्य सामने आया था कि फैक्ट्री संचालकों के निर्धारित क्षमता से ज्यादा पानी छोड़ने के कारण यह स्थिति पैदा हो रही है। इसको लेकर जिला मजिस्ट्रेट ने काफी टिप्पणियां भी की थीं। इसके बाद भी अभी तक प्लांटों की रिपोर्ट में सभी सैंपल फेल ही रहे हैं, इसका निशाना सीईटीपी को बनना पड़ रहा है।
केमिकल टेक्निकल स्टाफ भी कंपनी का होगा : 4 साल पहले सीईटीपी ने चारों प्लांटों को ठेके पर दिया था, मगर पानी ट्रीट करने में प्रयोग किए जाने वाले केमिकल सप्लाई का जिम्मा सीईटीपी ने अपने हाथ में ही रखा था, मगर इस बार सब कुछ ठेकेदार पर ही छोड़ दिया गया है। इसमें पहली शर्त ही यह रखी है कि ठेकेदार कंपनी को जो भी नॉर्म्स राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तय कर रखे हैं, उनके अनुरूप पानी ट्रीट करके देना होगा। साथ ही जो भी टेक्निकल स्टाफ या अन्य कर्मचारी लगाए जाएंगे, वे भी ठेकेदार कंपनी के होंगे। सीईटीपी मात्र अपने यहां से बिजली तथा जेनरेटर सेट ही उपलब्ध कराएगी।