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स्कूल-धर्मशाला में नहीं लगेंगे महिला नसबंदी शिविर
{राज्य जिला स्तर पर क्वालिटी एश्योरेंस कमेटी का गठन किया जाए।
{शिविर के एक दिन पहले ओटी की साफ-सफाई, उपकरणों की जांच तथा फ्यूमीगेशन करना होगा।
{नसबंदी केसेज का पंजीकरण, रजिस्टर, सहमति पत्र, केस कार्ड, सर्जन चैक लिस्ट, फॉलोअप कार्ड, ऑपरेशन का अस्थायी प्रमाण पत्र, क्षतिपूर्ति एवं प्रेरक राशि प्राप्त करने का आवेदन, महिला के परिजनों के मोबाइल नंबर रखने होंगे।
{ऑपरेशन के दौरान एनेस्थीसिया, गायनी के डॉक्टर की उपस्थिति जरूरी।
{सर्जन के प्रशिक्षण लेने के बाद ही नसबंदी ऑपरेशन किए जाएं।
{ऑपरेशन से पहले समस्त जांच प्रक्रिया के दौरान महिला की प्राइवेसी रखनी होगी।
{नसबंदी प्रक्रिया सुबह दस बजे तक प्रारंभ हो जानी चाहिए।
{चिकित्सकीय मापदंडों के अनुसार ही सर्जन को ऑपरेशन की सलाह।
{परिजनों के लिए बैठने एवं चाय-पानी की उचित व्यवस्था करनी होगी।
{महिला के गर्भवती होने पर एमटीपी के लिए सहमत होने पर सेवाएं दी जाएंगी।
{केसेज के लिए सर्दी के मौसम में कंबल या रजाई तथा गर्मी में पंखे कूलर की व्यवस्था करनी होगी।
{केस में जटिलता या किसी तरह की दिक्कत होने पर रैफर कर बेहतर इलाज की सुविधा उपलब्ध करानी होगी।
{केस को डिस्चार्ज करने के साथ ही स्थानीय भाषा में दवाओं की जानकारी देना जरूरी।
{एनजीओ और निजी चिकित्सालय के आवंटित शिविरों की गहन मॉनिटरिंग।
{ऑपरेशन नहीं होने पर केस कार्ड पर कारणों का उल्लेख करना तथा ऐसे मामलों में अस्थायी प्रमाण पत्र जारी नहीं करना।
{जिला क्वालिटी एश्योरेंस कमेटी की तीन माह में एक बार मीटिंग होगी और मिनिट्स परियोजना निदेशक (परिवार कल्याण) को भेजेंगे।
हैल्थ रिपोर्टर | जयपुर
अबस्कूल, धर्मशाला या खुले स्थान पर महिला नसबंदी शिविर नहीं लगाए जा सकेंगे। महिला नसबंदी ऑ़परेशन अब सिर्फ चिकित्सा संस्थानों में ही होंगे। चिकित्सा मंत्री के निर्देश के बाद इस संबंध में निदेशक (आरसीएच) डॉ. हरिओम शर्मा ने संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। दैनिक भास्कर ने 9 फरवरी के अंक में इस संबंध में ‘लापरवाही डॉक्टरों की, खामियाजा भुगतना पड़ रहा है सरकार को’ खबर प्रकाशित की थी। इसी के बाद ये निर्णय लिए गए हैं।