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हर मुठभेड़ की सीआईडी जांच कराएं : सुप्रीम कोर्ट
मुठभेड़के फर्जी मामले रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके तहत हर मुठभेड़ की जांच राज्य की सीआईडी से करानी होगी। जांच रिपोर्ट आने तक मुठभेड़ से जुड़े किसी सुरक्षाकर्मी को कोई वीरता पुरस्कार नहीं दिया जाएगा।
कोर्ट में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टी (पीयूसीएल) ने मुंबई में फर्जी मुठभेड़ों का मसला उठाया था। शहर में 1995 से 1997 के बीच 99 मुठभेड़ में 135 लोगों की मौत हुई थी।
संगठन ने ऐसे मामलों में दिशानिर्देश जारी करने की मांग की थी। इस पर चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय बेंच ने 16 बिंदुओं में दिशा-निर्देश जारी किए। इसमें सभी राज्यों की पुलिस को कार्रवाई करने को कहा गया है।
पुलिस,मानवाधिकार आयोग को दिए निर्देश - पढें़ पेज 4
यहहैं दिशानिर्देश
पुलिसके लिए:
1. आपराधिक गतिविधि की सूचना दर्ज करें। संदिग्ध का नाम या घटना का स्थान लिखें।
2. मुठभेड़ में संदिग्ध के मारे जाने पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो। मामला कोर्ट को भेजा जाए।
3. मुठभेड़ की स्वतंत्र जांच सीआईडी या किसी अन्य थाने की पुलिस से कराई जाए।
4. जांच में मुठभेड़ फर्जी नजर आती है तो अधिकारी को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई की जाए।
7. संबंधित अधिकारी अपने हथियार फॉरेंसिक और बैलिस्टिक एनालिसिस के लिए जमा कराएं।
8. पुलिस अफसर के परिवार को घटना की सूचना दी जाए। जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद भी दी जाए।
9. जांच पूरी होने तक संबंधित पुलिसकर्मी को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन या सम्मान दिया जाए।
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मजिस्ट्रेट के लिए
1. मजिस्ट्रियल जांच की जाए। इसकी रिपोर्ट ज्युडिशियल मजिस्ट्रेट को भेजी जाए।
2. घायल अपराधी को तत्काल चिकित्सकीय मदद दी जाए। मजिस्ट्रेट बयान दर्ज करें।
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मानवाधिकार आयोग के लिए
1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तब तक दखल दें, जब तक कि जांच पर संदेह हो। हालांकि, घटना की जानकारी तत्काल राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार आयोग को भेजी जाए।
2. डीजीपी हर साल 15 जनवरी और 15 जुलाई से पहले छह महीने की रिपोर्ट भेजें। इसमें पुलिस फायरिंग में हुई मौतों की विस्तृत जानकारी हो।
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पीड़ित के लिए
1. पुलिस फायरिंग में अपराधी की मौत होने पर उसके रिश्तेदार को तत्काल इसकी सूचना दी जाए।