- Hindi News
- स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग से होगा भविष्य का मजबूत निर्माण
स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग से होगा भविष्य का मजबूत निर्माण
जीनियरिंग के सबसे पुराने विषय सिविल इंजीनियरिंग की ही एक शाखा है स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग। इसे सिविल इंजीनियरिंग का एक विशेष क्षेत्र माना जाता है इसके बावजूद स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग की उपयोगिता विविधतापूर्ण है। जहां सिविल इंजीनियर्स सड़कों, सुरंगों, पुलों आदि को डिजाइन करते हैं वहीं स्ट्रक्चरल इंजीनियर इसके खास आर्किटेक्चरल पहलुओं जैसे बीम, नींव, कॉलम और फर्श की स्ट्रक्चरल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। आसान शब्दों में कहें तो स्ट्रक्चरल इंजीनियर वे प्रोफेशनल होते हैं जो कंस्ट्रक्शन कंपनियों के साथ काम करते हैं या विभिन्न संरचनाओं और इमारतों की डिजाइनिंग, प्लानिंग और समीक्षा करते हैं और इस काम में वे पर्यावरणीय, आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और कलात्मक पहलुओं को ध्यान में रखते हैं।
कामकी जिम्मेदारियां
स्ट्रक्चरलइंजीनियर घराें, थियेटर, स्पोर्ट्स वेन्यू, अस्पताल, ऑफिस की बिल्डिंग्स, पुल, ऑइल रिग्स, स्पेस सैटेलाइट, जहाज और एयरक्राफ्ट्स जैसी संरचनाओं की डिजाइन करते हैं। इन संरचनाओं को डिजाइन करते वक्त इंजीनियर्स को इस बात का खास ख्याल रखना होता कि ये निर्माण मजबूत हों और पर्यावरणीय आपदाओं और मानवीय दबावों को झेल सकें। इनका काम किसी भी आर्किटेक्चरल प्रोजेक्ट की नींव रखे जाने से लेकर उसके पूरी तरह तैयार हो जाने तक की पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखने का होता है।
योग्यता
उम्मीदवारको सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर प्रोग्राम पढ़ना होगा। इसके लिए अलग से बीई या बीटेक डिग्री कोर्स नहीं है। इच्छुक स्टूडेंट्स सिविल/ मेकैनिकल इंजीनियरिंग में बीई / बीटेक डिग्री लेकर स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमई / एमटेक कर सकते हैं। गेट परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक होगा।
कहांसे करें पढ़ाई
इंडियनइंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मुम्बई
www.iitb.ac.in
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
www.iitd.ac.in
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, खड़गपुर
www.iitkgp.ac.in
बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पिलानी
www.bits-pilani.ac.in
अवसर
देशमें बड़े स्तर पर हो रहे निर्माण कार्यों में स्ट्रक्चरल इंजीनियरों की जरूरत महसूस की जा रही है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं भरपूर है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर पुलों, इमारतों, पाइपलाइनों, इंडस्ट्रियल स्ट्रक्चर या स्पेशल मेकैनिकल स्ट्रक्चर जैसे कि वाहनों, जहाजों और एयरक्राफ्ट्स इंजीनियरिंग के विशेष क्षेत्र में स्पेशलाइज करते हैं। कॅरिअर के लिहाज से कई क्षेत्र अवसर प्रदान कर रहे हैं, खासतौर से आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन संबंधित सेवाओं के साथ-साथ सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों में। इन क्षेत्रों में आप सुपरवाइजरी या एडमिनिस्ट्रेटिव पदों पर नौकरी कर सकते है। दूसरे विकल्प के तौर पर आप कॉन्ट्रैक्ट इंजीनियर या कंसल्टेंट के रूप में स्वतंत्र रूप से काम कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी मंे रिसर्च या शिक्षण संबंधी कार्य भी कर सकते हैं। स्ट्रक्चरल इंजीनियरों को नियुक्त करने वाली कुछ प्रमुख कंपनियों में भारत हेवी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड, लार्सन एंड टूब्रो, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टेलर ग्रुप ऑफ कंपनीज जैसे नाम शामिल हैं।
वेतन
वेतनकई कारकों पर निर्भर करता है जिनमें स्थान और नियोक्ता प्रमुख हैं। निजी क्षेत्र में शुरुआती मासिक आय 18,000 से 20,000 रुपए तक हो सकती है।
स्ट्रक्चरल इंजीनियर बनने के लिए आपको सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर्स डिग्री लेनी होगी। दरअसल इसके लिए अलग से बीई या बीटेक डिग्री कोर्स नहीं है। स्ट्रक्चरल इंजीनियर बनने के लिए आप सिविल / मेकेनिकल इंजीनियरिंग में बीई / बीटेक डिग्री लेकर स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में एमई / एमटेक कर सकते हैं। इसके लिए गेट परीक्षा उत्तीर्ण करना जरूरी है।