• Hindi News
  • तस्करों के गढ़ में पुलिस की छापेमारी, छह गिरफ्तार

तस्करों के गढ़ में पुलिस की छापेमारी, छह गिरफ्तार

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
भास्कर की ओर से एक दिन पहले किए गए नशे के तस्करों के नेटवर्क के खुलासे के बाद अब अफीम की खेती और तस्करों के इस तक पहुंचने की जानकारी...

जानिए खेत से नसों तक कैसे पहुंचता है काला जहर

डोडे में चीरा लगते ही शुरू हो जाती है अफीम की सौदेबाजी

सबसे बड़ा खुलासा-2

नशेके कारोबार का पर्दाफाश

भास्कर खबरका असर

प्रतापगढ़से महज 10-15 किमी दूर स्थित बसाड़, अखेपुर देवल्दी, नौगांव यूं तो आम गांवों जैसे ही नजर आते हैं लेकिन इनका नेटवर्क राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। यह इलाका अफीम के साथ-साथ ब्राउन शुगर की भी बड़ी मंडी बन रहा है। हाल ही बसाड़ में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूराे की टीम ने एक किलो हेरोइन पकड़ी थी जिसकी कीमत एक करोड़ रु. से भी ज्यादा थी

जमीन में दबाकर रखते हैं अफीम

तहकीकातमें हर जगह यह बात सामने आई कि आधा-एक किलो अफीम की जगह तस्कर 5-10 किलो या इससे ज्यादा अफीम का सौदा आसानी से करते हैं। इसके पीछे कारण सामने आया कि बड़े तस्कर 100-200 किलोग्राम तक अफीम खुफिया जगहाें पर जमीन के भीतर छिपा कर रखते हैं। छोटा सौदागर आने पर इसे बाहर नहीं निकालते।

भास्कर रिपोर्टर्स ने कई दिन तक प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़ और मंदसौर के खेतों में जाकर जानकारी जुटाई। प्रतापगढ़ के गांवों में अफीम की खेती सफेद फूलों से लहलहा रही थी। कुछ चुनिंदा गांवों में ही डोडे निकलना शुरू हुए थे। तहकीकात में सामने आया िक तस्करी का नेटवर्क इन्हीं के खेतों के इर्द-गिर्द घूमता है। खेत में तैयार अफीम पर सबसे पहले सरकार का हक होता है, लेकिन सरकार को तय स्टॉक देने के बाद कई किसान बची हुई अफीम तस्करों के हवाले कर देतेे हैं। अफीम की सरकारी खरीद तो 1700-2500 रु. किलो के बीच है, लेकिन किसान को तस्करों से एक लाख रुपए प्रति किलोग्राम की आमदनी होती है। इसी लालच ने अफीम तस्करों की खेत तक घुसपैठ कर दी। वे यहीं से अफीम जुटाते हैं। शेष| पेज 4

किसानोंसे बातचीत से कई गांवों के बारे में भी पता चला, जिनमें प्रतापगढ़ जिले के बसाड़ और नौगांव प्रमुख थे। इन्हीं गांवों की खाक छानते हुए हमें तस्करों के नेटवर्क तक पहुंचा दिया।









मिलावटीअफीम भी थमा देते हैं : नशेकी इस मंडी में ग्राहक देखकर माल तय होता है। जानकार लोगों को असली अफीम की खेप दी जाती है जबकि अनजान और नए लोगों को मिलावटी पकड़ा दी जाती है। मिलावट का काम भी इन्हीं जगहों पर होता है। बच्चों के दूध के साथ पिए जाने वाले बॉर्नविटा, बूस्ट, कॉम्प्लान और काॅफी पाउडर जैसी चीजें और नशीली दवाएं मिलाकर आधा किलो अफीम को दो से ढाई किलो तक बना दिया जाता है।

दसआरी पर सरकार को देनी होती है 7.5 किलो अफीम : सरकारकी ओर से अफीम की खेती के लिए जो पट्टे जारी किए जाते हैं उनमें 10 आरी के पट्टे पर साढ़े सात किलो अफीम सरकार को जमा करानी होती है। किसान को खेती में नुकसान भी होता है तो भी इतनी मात्रा तो सरकार को देनी ही होगी। देने पर लाइसेंस रद्द कर दिया जाता है। हालांकि, डोडे पर चीरा लगाने से पहले सूचना देकर सरकारी टीम की मौजूदगी में खेती को नष्ट भी करवा सकते हैं।

आनंद चौधरी/रणजीतसिंह चारण | जयपुर

राज्यमें अफीम के साथ-साथ खेतों में तस्करों की जड़ें भी पनपती हैं। तस्करों की नजरें खेतों में अफीम के बीज पड़ते ही वहां जम जाती हैं। यूं तो अफीम की खेती सरकारी एजेंसी सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स की देखरेख में होती है, लेकिन डोडे में चीरा लगते ही तस्कर और भी ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं। किसानों से सौदेबाजी शुरू हो जाती है। खेतों में सिर्फ इतनी ही अफीम छोड़ी जाती है, जितनी सरकारी खजाने में जमा करानी होती है, बाकी को तस्कर मोटे दामों पर खरीद लेते हैं।

{राजस्थान में 17044 किसानों के पास अफीम उत्पादन का पट्टा

{देश में 34973 किसानों के पास हैं अफीम उत्पादन का लाइसेंस

{मप्र लाइसेंस के मामले में है नंबर 1 वहां 17781 लाइसेंस

स्रोत : सेंट्रल ब्यूरो ऑफ नारकोटिक्स

14 फरवरी को प्रकाशित खबर।

प्रतापगढ़ | भास्करमें नशे के नेटवर्क का खुलासा और अफीम सौदागरों के फोटो प्रकाशित होने के बाद पुलिस ने प्रतापगढ़ में छापेमारी की। शनिवार देर रात छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। इनके पास पांच लाख रुपए की स्मैक मिली। इन्होंने बताया कि ये लोग देवल्दी के जुबेर से स्मैक खरीद कर इंदौर ले जाने वाले थे। पुलिस ने देवास निवासी कन्नीराम जाट, इंदौर निवासी विजय सालवी, संदीप पिंगलै, उमेश तंवर, गजेन्द्र सालवी और जीवन पटेल को गिरफ्तार किया है।





दो दर्जन से अधिक संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। धरपकड़ के लिए चार थानों की पुलिस जुटी है।







इनमें प्रतापगढ़, अरनोद, सालमगढ़, छोटी सादड़ी थाना पुलिस ने शनिवार रात से ही दबिश की कार्रवाई शुरू कर दी। ऐसा भी हो सकता है कि गुड्डू भाई नामक तस्कर मध्यप्रदेश का रहने वाला हो, यह मानकर प्रतापगढ़ पुलिस पड़ोसी राज्य की मंदसौर नीमच पुलिस से भी सहयोग ले रही है। पुलिस ने मध्यप्रदेश के मंदसौर और नीमच पुलिस से भी सहयोग लिया है।