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छात्रा ने पूछा | महंगाई घटने के बाद भी डोसा सस्ता क्यों नहीं होता?

6 वर्ष पहले
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रिजर्वबैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने एक बार फिर डोसा के जरिए इकोनॉमिक्स को समझाने की कोशिश की है। राजन शनिवार को एक कार्यक्रम में थे। वहां इंजीनियरिंग की एक छात्रा ने उनसे पूछा कि- ‘जब महंगाई दर बढ़ती है तो साथ-साथ डोसा भी महंगा हो जाता है। लेकिन जब महंगाई दर घटती है तब डोसा सस्ता नहीं होता। आखिर ऐसा क्यों होता है?’

राजन ने जवाब रोचक अंदाज में दिया। बोले- ‘मेरे विचार से इसकी सबसे बड़ी वजह है तवा। दरअसल, डोसा बनाने की टेक्नोलॉजी नहीं बदली है। अब भी डोसा बनाने वाला व्यक्ति तवे पर घोल डालता है, फैलाता है और उतार लेता है। इसकी टेक्नोलॉजी का विकास नहीं हुआ है। दूसरी तरफ डोसा बनाने वाले का वेतन बढ़ता जा रहा है। इससे लागत बढ़ रही है।’ राजन ने फिर इसे अर्थव्यवस्था से जोड़कर समझाया। बोले- ‘फैक्टरी या बैंक में उत्पादकता बढ़ी है। वर्कर ज्यादा प्रोडक्ट बनाने लगा है। क्लर्क ज्यादा ग्राहकों को सेवाएं दे रहा है। यह टेक्नोलॉजी से हुआ। इकोनॉमी में दो तरह के सेक्टर हैं। एक, जिसमें टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है। दूसरा, जहां पुरानी टेक्नोलॉजी से काम हो रहा है। शेष| पेज 4







ऐसेमें पुरानी टेक्नोलॉजी वाले सेक्टर में चीजों के दाम तेजी से बढ़ेंगे।’

राजन ने 29 जनवरी को भी ‘डोसा इकोनॉमिक्स’ के जरिए महंगाई को समझाया था। दिल्ली में उन्होंने कहा था- पेंशनभोगी की आय सीमित होती है। बैंक से ब्याज के रूप में। अगर महंगाई बढ़ती है तो वह कम डोसा खरीद सकेगा। अगर महंगाई दर कम हुई तो वह ज्यादा डोसा खरीदने में सक्षम होगा।

भारत निर्यात में प्रतिस्पर्धा कर सकें इसके लिए रुपए का सस्ता होना जरूरी है। दो साल में दूसरी करैंसी के मुकाबले स्थिर बना है।







{हमारा फोकस महंगाई कम करना है। ताकि लोग यह पूछें कि रु. कमजोर क्यों हो रहा है।