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संपत्तियों का होगा सैटेलाइट चित्रण

5 वर्ष पहले
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जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम से गांवों में सृजित नई पुरानी संपत्तियों का डेटा तैयार होगा

भास्करसंवाददाता | पाली

ग्राम पंचायत स्तर पर परिसंपत्तियों का शीघ्र सैटेलाइट चित्रण होगा। पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार के ई-पंचायत मिशन मोड़ प्रोजेक्ट के अंतर्गत जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से गांवों में सृजित नई पुरानी संपत्तियों का डेटा तैयार होगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) की बेवसाइट से संबद्ध भुवन पंचायत को इससे जोड़ा है। जीआईएस एप्लीकेशन आधारित कार्य के लिए विभाग ने वीडियो कांफ्रेंस में सभी जिला नोडल अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए हैं। राज्य में यह जीपीएस प्रणाली फिलहाल मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के कार्यों में अपनाई जा रही है।

हर कार्य की मैपिंग और मॉनिटरिंग इस तकनीक से की जा रही है। इतना ही नहीं गुजरात प्रदेश में तो यह सिस्टम मनरेगा योजना में भी प्रभावी है। पंचायतीराज मंत्रालय, भारत सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग की सभी योजनाओं के विभिन्न कार्यों को इस दायरे में शामिल करने की मंशा से इस एप को अनिवार्य रूप पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है। भौगोलिक मानचित्र में अंकित होंगे गांव जीआईएस से ग्राम पंचायतों की संपत्तियां भौगोलिक मानचित्र में प्रदर्शित होंगी। अक्षांश देशांतर के माध्यम से खाली भूमि परिसंपत्ति की मैपिंग से विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता रहेगी। भुवन पंचायत के एप्स के जरिए डेटा एमआईएस पर इंद्राज होने से आगामी कार्यों की जांच मॉनिटरिंग में खासा लाभ होगा। खास बात यह है कि गांवों में कई बार सड़क,तालाब भवन निर्माण जैसे एक ही कार्य को अलग-अलग योजनाओं में प्रदर्शित कर स्वीकृति भुगतान उठा लेने के मामले प्रकाश में आते हैं,इससे पूरी तरह अंकुश लग जाएगा। इस मैपिंग में ड्रेनेज और जल निकायों,भूमि उपयोग और भूमि कवर,बस्तियों का इंफ्रास्ट्रक्चर सहित भूजल संभावनाएं, भूमि क्षमता वर्गीकरण, मिट्टी गहराई, मृदा संरचना अन्य संपत्तियों का सैटेलाइट चित्रण हो सकेगा।

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