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गर्भावस्था में कुछ सावधानी जरूरी

6 वर्ष पहले
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प्र सव पूर्व देखभाल गर्भवती महिलाओं और आने वाले शिशु दोनों के लिए बहुत जरूरी है। गर्भवती महिलाओं को नियमित चिकित्सा जांच करानी चाहिए। गर्भवती को इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि गर्भकाल के दौरान कैसे रहना है, क्या खाना है, क्या करना है और क्या नहीं आिद। गर्भवती की ठीक से देखभाल हो तो और मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु के मामलों में कमी लाई जा सकती है।

गर्भावस्था शुरू होते ही आप लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें। हर 15 दिन बाद डाक्टर से अपना चेकअप करवाती रहें। लापरवाही करें।

कमर का दर्द आजकल की आम समस्या है लेकिन गर्भकाल में यह बढ़ जाती है। ऎसा कई बार कैल्शियम की कमी से भी होता है। शरीर को सही स्थिति में रखकर भरपूर आराम करना ही इस तकलीफ का इलाज है। गर्भावस्था के दौरार साफ-सफाई रखें। शरीर के साथ ही मुंह की सफाई पर भी ध्यान दें, दो बार ब्रश करें।

जैसे ही पुष्टि हो जाती है कि आप गर्भवती हैं उसके बाद से प्रसव होने तक आप किसी स्त्री रोग विशेषज्ञ की निगरानी में रहें तथा नियमित रूप से अपनी चिकित्सीय जांच कराती रहें। गर्भवती को स्वयं के लिए ही नहीं, वरन आने वाले शिशु के लिए भी सही जानकारी रखना जरूरी होता है।

गर्भकाल में आपको अपने साथ अपने शिशु के लिए भी भोजन करना आवश्यक होता है, पर इसका मतलब यह भी नहीं कि आप जरूरत से ज्यादा खाएं, बस, आपका आहार संतुलित होना चाहिए जिसमें सभी पोषक तत्वों का पर्याप्त मात्रा में समावेश हो। डॉक्टर से डाइट चार्ट जरूर लें।

{चेहरे या उंगलियों पर सूजन आना {बहुत ज्यादा चक्कर आना {कंपकंपी के साथ बुखार आना {लगातार असहनीय सिरदर्द होना {लगातार उल्टियां होना {पेशाब मार्ग में रुकावट {योनि मार्ग से तरल पदार्थ का निकलना {योनि मार्ग से रक्तस्त्राव होना {�पेट दर्द होना {�आंखों की रोशनी में परिवर्तन आना।

ध्यान दें

शिशु की हलचल

गर्भकी अवधि के अनुसार गर्भ में शिशु की हलचल जारी रहनी चाहिए। यदि बहुत कम हो या नहीं हो तो सतर्क हो जाएं। इसकी जानकारी तुरंत डॉक्टर को दें। जांच कराएं।

पहनावा

गर्भावस्थामें तंग कपड़े पहनें और ही अत्याधिक ढीले। इस अवस्था में ऊंची एड़ी के सैंडल पहनें। जरा सी असावधानी से आप गिर सकती हैं। भारी श्रम वाला कार्य नहीं करना चाहिए, ही अधिक वजन उठाना चाहिए।

नशा

गर्भावस्थाके दौरान धूम्रपान या तंबाकू, नशीले पदार्थ, मदिरा आदि का सेवन करें। इससे आपके गर्भ को खतरा हो सकता है। किसी भी प्रकार का नशा आपके आैर शिशु दोनों के लिए घातक है। प्रदूषण वाली जगह पर जाएं।

सफर

इसअवधि में बस के बजाए ट्रेन या कार के सफर को प्राथमिकता दें आठवें और नौवंे महीने के दौरान सफर ही करें तो अच्छा है।

गर्भावस्था मंे सुबह-शाम थोड़ा पैदल टहलें चौबीस घंटे मंे आठ घंटे की नींद अवश्य लें।

डॉ शांति राय स्त्रीएवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ

ब्लड प्रेशर

�गर्भावस्थामें उच्च रक्तचाप सबसे बड़ी समस्या है। इसलिए बीपी चेक करवाते रहें। उच्च रक्तचाप यदि लंबे समय तक रहे तो ह्वदय रोग, लकवा, आंखों की रोशनी चले जाने जैसी परेशानी हो सकती है।

कैल्शियम

गर्भावस्थाके दौरान पैरों की मांसपेशियों में अकड़न, ऎंठन होना भी सामान्य समस्या है। इसके लिए गर्भवती महिला को भरपूर मात्रा में कैल्शियम लेना चाहिए। मांसपेशियों की हल्की मालिश करने पर भी आराम मिलता है।

हिमोग्लोबिन

समय-समयपर आपको अपने हीमोग्लोबिन की जांच करानी भी जरूरी होती है। गर्भकाल में खून की कमी हो, इसका पूरा ध्यान रखना चाहिए अन्यथा प्रसव के समय परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

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