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अगले साल से सिलेबस में लागू होगा

Dainik Bhaskar

Oct 08, 2016, 09:25 AM IST

Rani News - पहले भी सिलेबस बदलने पर मचा था बवाल कक्षा6 से 8 तक के सिलेबस से रामप्रसाद बिस्मिल की कविता “सरफरोशी की तमन्ना अब...

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पहले भी सिलेबस बदलने पर मचा था बवाल

कक्षा6 से 8 तक के सिलेबस से रामप्रसाद बिस्मिल की कविता “सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है...” को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया था। पुराने पाठ्यक्रम में कक्षा 6 में सुभद्रा कुमारी चौहान की झांसी की रानी नामक कविता ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी...’ को हटा दिया गया था। प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी जानकारी को भी सीमित कर दिया गया था। इसको लेकर प्रदेश में काफी बवाल मचा था। बाद में इनको शामिल किया गया था।





इनके अलावा बड़ी संख्या में देश और प्रदेश के महापुरुषों आचार्य चाणक्य, महर्षि पाराशर, महाराणा प्रताप, कुंभा, राणा सांगा, हाड़ी रानी मीराबाई, विक्रम साराभाई, होमी जहांगीर भाभा, विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, सुभाषचंद बोस, राव शेखा, डॉ. राधाकृष्णन, मौलाना अब्दुल कलाम, इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह, पीवी नरसिम्हा राव सहित कई महापुरुषों को शामिल किया गया।

कांग्रेस ने कहा- पाठ्यक्रम का राजनीतिकरण कर रही है भाजपा

कांग्रेसकी प्रदेश उपाध्यक्ष अर्चना शर्मा का कहना है कि भाजपा जब से सत्ता में आई है पाठ्यक्रम का राजनीतिकरण और भगवाकरण कर रही है। आपातकाल को सिलेबस में शामिल करके भाजपा इसका सियासी फायदा उठाना चाहती है। इतिहास से छेड़छाड़ करते हुए भाजपा ने प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को पाठ्यक्रम से हटा दिया था। अब भी अगर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर सिलेबस में शामिल किया गया तो हम इसका विरोध करेंगे।

शिक्षा राज्य मंत्री बोले- युवा जानेंगे देश में क्या हालात हुए

शिक्षाराज्यमंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि हम बच्चों को आजादी का इतिहास पढ़ाते हैं। आपातकाल भी आजादी के बाद का इतिहास है और देश की बड़ी घटनाओं में से एक है। युवा पीढ़ी जानना चाहती है कि आपातकाल के समय का भारत कैसा था। दो वर्षों में किस प्रकार लोकतंत्र पर प्रहार हुए। इस घटना को शामिल करने से युवा पीढ़ी को आपातकाल के बारे में सही जानकारी मिल सकेगी।

1975 में लागू हुआ था आपातकाल, विपक्षी नेता किए गए थे गिरफ्तार

41साल पहले 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आदेश पर देश में आपातकाल लागू किया गया था। आपातकाल वो दौर था जब सत्ता ने आम आदमी की आवाज को कुचलने की सबसे निरंकुश कोशिश की थी। इंदिरा गांधी 12 जून 1975 को आए इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले से काफी बेचैन हो गई थी, जिसमें रायबरेली से उनका चुनाव निरस्त कर दिया गया था। तब उन्होंने धारा-352 के तहत सरकार को प्राप्त असीमित अधिकारों का उपयोग करते हुए देश में आंतरिक आपातकाल लागू किया। आपात काल का मतलब था, इंदिरा जब तक चाहें सत्ता में रह सकती थीं। लोकसभा-विधानसभा के लिए चुनाव की जरूरत नहीं थी। मीडिया और अखबार आजाद नहीं थे। नागरिकों के मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे। आपातकाल 25 जून 1975 की मध्यरात्रि से 21 मार्च 1977 के बीच रहा था। 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियों का दौर शुरू हो गया था। जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडीस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था।

शिक्षा विभाग 10वीं या 12वीं के पाठ्यक्रम में शामिल करेगा

अब स्कूली बच्चों को पढ़ाएंगे इंदिरा गांधी का आपातकाल

विनोद मित्तल | जयपुर

देशमें 41 साल पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के शासनकाल में लागू हुआ आपातकाल अब स्कूली पाठ्‌यक्रम का हिस्सा बनेगा। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अभी यह तय नहीं किया है कि इसे 10वीं में शामिल किया जाएगा या 12वीं कक्षा में। लेकिन इन दोनों में से ही एक कक्षा के सिलेबस में यह पढ़ने को मिलेगा।

शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी का कहना है कि पाठ्यक्रम में इसे शामिल किए जाने के बाद बच्चों को यह पता लग सकेगा कि आपातकाल के समय भारत की क्या स्थिति हो गई थी। दूसरी ओर, कांग्रेस ने पाठ्‌यक्रम का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि सरकार ने इस साल पहली से 9वीं और 11वीं का नया पाठ्यक्रम लागू किया है। अब इस पाठ्यक्रम को अगले साल से लागू करने की तैयारी है।

केंद्रऔर राज्य सरकार की चार योजनाएं भी शामिल होंगी

केंद्रऔर राज्य सरकार की चार महत्वाकांक्षी योजनाओं जल स्वावलंबन, कौशल विकास, स्वच्छता और भामाशाह योजना को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कक्षा 9 से 12वीं तक वर्तमान में चल रही राजस्थान अध्ययन नामक किताब के स्थान पर हमारी योजनाएं नामक पुस्तिका लागू होगी। इसमें इन योजनाओं को पढ़ाया जाएगा।

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