पानी की कमी नहीं हो, इसलिए ऐतिहासिक बावड़ी-तालाबों की लेंगे सुध
भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर
नगरपरिषद सभापति कमिश्नर ने शहर में संभावित पेयजल संकट से उबरने ऐतिहासिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए जल स्वावलंबन योजना को संजीवनी बताया। शहर में प्रवेश के तीनों मार्ग पर स्वागत द्वार लगवाने की बात भी कही।
आयोजित प्रेसवार्ता में जल संसाधन विभाग के जेइएन जेपी यादव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के जेईएन शंकरलाल रोत राजसिंह ननोमा भी मौजूद थे।
क्याहोंगे कार्य : सभापतिने बताया कि उन्होंने कमिश्नर के साथ सुबह शहर की सभी ऐतिहासिक बावडिय़ों तालाबों का अवलोकन किया। उनकी दुर्दशा को देखने के बाद सभी के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया है। इसके लिए विस्तृत रिपोर्ट बनाई जा रही है, साथ ही आवश्यक कार्य हाथों हाथ कराए जा रहे है। इसके तहत सभी बावडिय़ों की दीवारें ऊंची होंगी, जिससे लोग भीतर कचरा नहीं उड़ेल सके। साथ ही अंदर जाने के रास्तों पर गेट भी लगाए जा रहे है। सभी बावडिय़ों का पानी साफ करने के लिए ट्रीटमेंट होगा। उन्हें बताया गया कि असामाजिक तत्व बावडिय़ों में गंदा तेल डाल देते है। इस तरह की समस्या उदय बाव में पेश आने के बाद पानी की सप्लाई बंद कर दी गई थी।
इस पर नगर परिषद खर्च से मौके पर चौकीदार लगाने के निर्देश दिए। केला बाव, रानी बाव, गणेशजी की बावड़ी, खारी बाव, रामबाव के जीर्णोद्धार की बात कही। उनका कहना था कि गर्मियों में पानी की कमी नहीं आए इसके लिए अभी से प्रयास किए जाएंगे। सभापति ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड ने तो पार्क की जमीन भी बेच दी है, जिससे बच्चों के मनोरंजन की समस्या हो रही है। फिर भी हम उन बचे हुए बगीचों को आबाद करने में जुटे हुए है। उन्होंने शहर के गेपसागर, घाटी, साबेला, पातेला जेर का तालाब को पुरा भरने उनके संरक्षण के लिए पैमाइश कराने की बात कहीं।
इसके बाद सभी तालाबों के चारों तरफ गेपसागर की ही तरह रिटर्निंग वॉल बनाने का निर्णय लिया गया है। इस पर शीघ्र ही काम शुरू हो जाएगा।
शहर में बनाए जाने वाले स्वागत द्वार का प्लान बताते सभापति कमिश्नर।