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पेज 11 के शेष..

7 वर्ष पहले
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उन्होंनेबताया कि वकील उपखंड न्यायालय में अपनी उपस्थिति नहीं देंगे तथा सहायक कलेक्टर एवं उपखंड अधिकारी रानीवाड़ा की अदालत में कार्य का बहिष्कार जारी रखेंगे इस मौके बार एसोसिएशन अध्यक्ष श्रवणसिंह देवड़ा, भंवरसिंह देवड़ा, जबराराम पुरोहित, पुखराज विश्रोई, जगदीशसिंह सोलंकी, वेनसिंह राठौड़, मोहनलाल विश्रोई, पुरणसिंह देवड़ा, नारायणसिंह करणोत, गणेश देवासी, रमेश कुमार सैन, जानु मेघवाल, अमृतलाल कटारिया, सहित कई अधिवक्तागण उपस्थित थे।

रानीवाड़ाके किसानों...

जिसमेंज्यादा मेहनत होने के साथ कभी मौसम की मार तो कभी कम उपज से किसानों के लिए हाडतोड़ मेहनत वाली खेती महंगी साबित हो रही थी। धीरे धीरे किसानों का रूझान पपीते की खेती पर बढ़ने लगा इससे जहां उनकी आमदनी में वृद्धि हुई वहीं मेहनत भी कम होने लगी। काश्तकारों ने बताया कि साल के अप्रैल तथा सितंबर माह में 8 बीघा खेत में 2300 पौधों से पपीते की खेती की जाती है।

एकपेड़ से कितनी उपज : पपीतेकी खेती में प्रति पौधे पर एक क्विंटल फल लग सकते है तथा एक फसल पर दो बार फल लगते है। जिसकी बाजार कीमत 8 रुपए प्रति किलो के हिसाब से व्यापारी बोली लगाते है। इस तरह पूरे साल की आवक करीब 18 लाख रुपए तक हो सकती है।

अनुदानमिले तो बढ़े प्रोत्साहन : बागवानीकृषि खेती के तहत प्रदेश के कुछ जिलों में सरकार की ओर से किसानों को अनुदान दिया जाता है मगर जालोर जिले में अनुदान नहीं मिलने से किसानों को इसका फायदा नही मिल रहा है। जालोर जिले में कई प्रगतिशील किसान उच्च गुणवत्ता वाली पपीते की फसल तैयार कर रहे है। उनका कहना है कि अनुदान मिले तो वे इसमें और उन्नति कर सकते है।

42ढाणियां जुड़ेंगी...

इसकेअलावा पनगारिया से मेघवालों की ढाणी भागलभीम से रेबारियों की ढाणी, ब्लॉक रानीवाड़ा के अंतर्गत भापड़ी से जागुंदा नाड़ी, वणधर से रेबारियों की ढाणी, करड़ा से कोनारों की ढाणी, लाखावास से लालपुरा, कोड़का से ओखा की ढाणी, सांतरू से मेडक नाड़ी, कोड़का से तलवानियों की ढाणी सेवाडिय़ा से रेबारियों का गोलिया को पक्की सड़क से जोड़ा जाएगा। इसी प्रकार ब्लॉक जसवंतपुरा के अंतर्गत पावटी से फेगा की ढाणी, धनपुरा से पुरोहितों की ढाणी, पांचेरी से बाबू भील की ढाणी मेघवालों की ढाणी, राजीकावास से निहाडिय़ों की ढाणी, पूरण से खावियों की ढाणी, दांतलावास से चौधरियों की ढाणी, राजपुरा से गंगा