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टमाटर के भाव गिरे, किसान सड़कों पर डाल रहे

5 वर्ष पहले
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टमाटरकी जिस फसल को देखकर किसान खुशी से फुले नहीं समा रहे थे,वही टमाटर अब किसानों के लिए आंसू का सबब बन गए हैं। क्षेत्र में जिस मात्रा में टमाटर का उत्पादन हुआ हैं, उस हिसाब से खरीदार नहीं होने से जहां मन माफिक भाव नहीं मिल रहे, वहीं व्यापारियों की ओर से रिजेक्ट माल सड़क पर फेंकना पड़ रहा हैं। क्षेत्र में टमाटर की बंपर पैदावार के चलते एक हैक्टेयर में करीब 200 से 250 क्विंटल टमाटर का उत्पादन हो रहा हैं। बडग़ांव में कुल 150 हैक्टेयर में कुल 37 हजार 500 क्ंिवटल टमाटर की उपज हुई हैं। इधर पैदावार के मुकाबले खरीदार नहीं होने से किसानों को अपनी उपज के दाम नहीं मिल रहे जिससे लागत भी गले पड़ रही हैं। ऐसे में किसानों को ओने-पोने दाम में टमाटर बेचना उनकी मजबूरी बनी हुई हैं।

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किसानोंका कहना है कि इतनी पैदावार होने के बावजूद क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों प्रशासन की ओर से कोल्ड स्टोरेज बनाने के लिए प्रयास नहीं करना किसानों का दुर्भाग्य हैं। हालात यह है कि टमाटर के दाम सात आठ रुपए किलो से घट कर तीन से चार रुपए प्रतिकिलो हो गए हैं। कम भावों पर भी खरीदार आनाकानी कर रहे हैं। वहीं हलकी क्वालिटी के टमाटर को तो खरीदार किसी कीमत पर खरीदने को तैयार नहीं हैं। जिससे ऐसे टमाटर को किसान सड़क पर डाल रहे हैं। सड़कों पर पड़े टमाटरों को पशु भी खा-खा कर ऊब चुके हैं। कस्बे समेत वगतापुरा, रामपुरा, अमरापुरा तथा जेतपुरा सहित आसपास के गांवों के किसान टमाटर की ट्रोलीयां भरकर शाम होते ही गांव में अन्य प्रदेश से आए व्यापारियों के टेंट पर पहुंच जाते हैं। जहां बाहर के व्यापारी टमाटर की क्वालिटी देखकर भाव दे रहे हैं। वहीं कमजोर क्वालिटी वाले टमाटर को खरीदना तो दूर देखते ही लेने से मना कर देते हैं। जिससे किसान उन टमाटरों को सड़क किनारे डाल रहे हैं। बंपर आवक के चलते टमाटर के भाव तीन से चार रुपए किलो के हिसाब से दाम मिल रहे हैं जिससे मजबूरन किसानों को घाटा खाकर माल बेचना पड़ रहा हैं। किसानों ने बताया कि एक ट्रैक्टर ट्रॉली में करीब २० क्विंटल टमाटर आते हैं जिसके लिए पांच हजार से आठ हजार रुपए तक मिल रहे हैं। इन दिनों बाजार में रोजाना करीब बीस पच्चीस ट्रॉली टमाटर बिकने रहे हैं। इनमें से हलकी क्वालिटी के टमाटर की करीब चार से पांच ट्रॉली के खरीदार नहीं मिलने से ऐसे टमाटर को सड़क पर फें कना पड़ रहा हैं। किसान बताते है कि एक ट्रॉली टमाटर खेत से निकालने की मजदूरी करीब १५ सौ रुपए पड़ती है, ट्रैक्टर का डीजल का खर्च अलग से है। किसानों ने अपना दर्द बया करते हुए बताया कि कोल्ड स्टोरेज के अभाव में वो टमाटर रखें भी तो कहां, टमाटर यदि पक कर खेत में ही सड़ जाए या फूल जाए तो खेत खराब हो जाता है। ऐसी स्थिति में उन्हें नुकसान उठाकर भी टमाटर बेचने पड़ रहे हैं।

कोल्डस्टोरेज नहीं : जालोरजिले में कोल्ड स्टोरेज नहीं होने से भी किसानों को अपनी उपज को स्टोरेज नहीं कर पाने से नुकसान उठाना पड़ रहा है। कोल्ड स्टोरेज होता तो किसान अपना माल वहां रख कर डिमांड के अनुसार माल बेचने की सुविधा मिल सकती हैं।

एग्रोफूडपार्क बनें तो खुले इंडस्ट्रीज का रास्ता : क्षेत्रमें प्रस्तावित एग्रो फूड पार्क बन जाए तो टमाटर अन्य सब्जियों की बंपर उपज के चलते किसानों को& ; अच्छे दाम मिलने की उम्मीद बंधती हैं। वहीं फूड ब्रेवरीज को लेकर इंडस्ट्रीज खुलने के चांसेज बनने के साथ क्षेत्र के युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद प्रबल होती हैं।े

अच्छी फसल, लेकिन इस बार कम आए व्यापारी

जसवंतपुरारानीवाड़ा क्षेत्र में टमाटरों की अच्छी फसल के कारण हर साल यहां पंजाब, हरियाणा तथा दिल्ली के व्यापारी अथवा आढ़तिए टैंट लगाकर किसानों के टमाटर खरीद कर उन्हें अपने प्रदेश में भेजते हैं। फिलवक्त रामपुरा वगतापुरा में बाहर के व्यापारी टेंट लगा सौदा कर रहे हैं। मगर इस बार पिछले साल के मुकाबले बहुत कम व्यापारी आए हैं। जिससे मांग के अभाव में भावों में गिरावट हुई हैं।

बडग़ांव. रूपावटी खुर्द के पास सड़क किनारे किसानों द्वारा डाले गए टमाटर।

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