201 प्रभात फेरियों का संगम
रूदकस्बे में रविवार को हरिबोल प्रभात फेरी का विशाल संगम हुआ। इससे पूरे कस्बे में चारों ओर वृदांवन जैसा माहौल हो गया।
रूद में जिले सहित भीलवाड़ा, राजसमंद अन्य जिलों की 201 गांवों की प्रभात फेरियों के दल पहुंचे। जो क्रम अनुसार रूद गांव में स्थित नृसिंहद्वारा मंदिर से जुलूस बैंडबाजों, हाथी घोड़ों के साथ हरि कीर्तन करते हुए रवाना हुए। चारभुजा मंदिर के होते हुए कस्बे के प्रमुख मार्गों से होते हुए भैरूजी बावजी के स्थान पर पहुंचकर प्रभात फेरियों का समापन हुआ। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर रामदयाल महाराज, महंत चेतनदास महाराज सहित अन्य संतों का प्रवचन हुआ। धर्मसभा में जगदगुरू श्रीरामदयाल महाराज ने हजारों की तादाद में उपस्थित श्रद्धालुओं भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि समय कभी रुकता नहीं है। समय गुरु दोनों ही व्यक्ति का मार्गदर्शन करते हैं। सर्वधर्म का मूल हरि कीर्तन है। उन्होंने कहा कि यदि संसार में परमात्मा नहीं है, हरि नहीं है। भगवान नहीं है तो उनका जिक्र क्यों होता है। अगर परमात्मा है, हरि है, भगवान है तो व्यक्ति फिक्र क्यों करता है। इसलिए किसी को फिक्र नहीं करनी चाहिए। उन्होंने भक्तों श्रद्धालुओं को आगाह किया कि यदि कुछ मांगना है तो भगवान राम से, सांवरिया सेठ से मांगो। किसी आम आदमी से मत मांगो, क्योंकि भगवान ही किसी को कुछ दे सकता है। उन्होंने 12 जनवरी को रामानंदाचार्य जयंती पर भीलवाड़ा जिले के माझावास में प्राकट्य स्थल पर आयोजित होने वाली प्रभात फेरियों जयंती कार्यक्रम में सभी प्रभात फेरियों को न्यौता देते हुए आने का आग्रह किया। चित्तौडगढ रामद्वारा के संत रमताराम महाराज ने कहा कि काशी, मथुरा, गंगा, त्रिवेणी, पुष्कर आदि तीर्थों पर स्नान करने वाला पुण्य, संतों के सत्संग में एक तरह से प्राप्त हो जाता है। सांवलिया धाम मुंगाना के महंत चेतनदास महाराज ने कहा कि अन्नदान भी बड़ा दान है और हरि बोल हरि नाम कीर्तन से जीवन का उत्थान होता है। आयोजक हंसराज जाट भंवरीदेवी जाट ने आभार जताया।
राशमी | रूदमें 201 हरिबोल प्रभात फेरियों के समागम में शामिल श्रद्धालु।
राशमी | भैरूबावजी में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए रामदयाल महाराज।
नृत्य करते पहुंचे भक्त
रूदगांव में हरिबोल प्रभात फेरियों के समागम को देखने के लिए अन्य कई गांवों से बडी संख्या में ग्राम