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मरुस्थलीय जिला घोषित करने की मांग

7 वर्ष पहले
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चूरू | पंचायतोंके पुनर्गठन में चूरू को मरुस्थलीय जिलों की श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर सोमवार को पूर्व जिला प्रमुख रामदेवसिंह ढाका के नेतृत्व में चूरू मरुस्थल जिला विकास एवं संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को पत्र सौंपा। पत्र में लिखा कि पंचायतों के पुनर्गठन में केवल बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर जोधपुर को ही शामिल किया गया है जबकि सारे मानदंड पूरे होने के बावजूद चूरू को छोड़ा गया है। चूरू जिला पूरी तरह से मरुस्थलीय जिला है। इसकी सभी तहसीलें मरुस्थलीय क्षेत्र में हैं। पूर्व मंें चूरू जिला राज्य एवं केंद्र के मरु विकास कार्यक्रमों का केंद्र रहा है। शुरू से ही यहां मरु विकास की सारी योजनाएं क्रियान्वित होती आई हैं। वर्तमान में भी पंचायतीराज विभाग की ओर से मरुस्थल विकास की अनेक योजनाएं जिले में संचालित की जा रही हैं। यहां मरुस्थलीय वनस्पतियां ही पैदा होती हैं, जिन पर अनेक शैक्षणिक वैज्ञानिक शोध कार्य हुए हैं। पत्र देने वालों में समिति के मंत्री विद्याधर पारीक, रतनगढ़ प्रभारी मालीराम सारस्वत, बीदासर के भंवरलाल ज्याणी, चूरू के मोहन आर्य, सरदारशहर के नारायण सिंह, सुजानगढ़ के देवकीनंदन पुजारी, कोषाध्यक्ष सवाई सिंह राठौड़, रामनाथ कस्वा, हनुमान कुलहरि आदि भी शामिल थे।