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6 करोड़ 32 लाख खर्च, फिर भी टंकियों में नहीं आया पानी
नगरपालिकारावतभाटा शहर में विकास और निर्माण कार्यों पर बेहिसाब पैसा खर्च कर रही है। अधिकांश निर्माण कार्य दो-दो बार हो रहे हंै। कई निर्माण कार्य पूरे होने के बाद भी उनका उपयोग नहीं हो रहा है। इसका एक उदाहरण नगरपालिका की आईएचएसडीपी योजना है, जिसमें 6 करोड़ 32 लाख की पेयजल योजना का उपयोग शुरू नहीं हो सका है। जबकि शहर के कई क्षेत्रों में पानी की किल्लत है। कई क्षेत्रों में पानी की सप्लाई दबाव से नहीं हो रही है। जिस कारण पानी के लिए आए दिन लोगों में झगड़े हो रहे हैं।
बिनासहमति के बनी योजना
नगरपालिकाने आईएचएसडीपी पेयजल आपूर्ति योजना बिना जलदाय विभाग की सहमति सुझाव और स्वीकृति के बनाई। सरकारी विभागों में बिना तालमेल और समन्वय के लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। जिनका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। इस योजना में 30 किलो मीटर पाइप लाइन बिछाई गई है।
विभाग के पास अतिरिक्त पानी देने की क्षमता नहीं
^नगरपालिकाने जलदाय विभाग से शहर में अतिरिक्त पानी की आपूर्ति के लिए कोई चर्चा नहीं की और ना ही इसके लिए विभाग से कोई सुझाव लिए। स्वीकृति भी नहीं ली गई है। टंकियां बनाकर पाइप लाइन बिछा दी गई। विभाग अपनी क्षमतानुसार शहर में पानी की आपूर्ति कर रहा है। विभाग के पास अतिरिक्त पानी देने की क्षमता नहीं है।- हरिपालसिंह , सहायकअभियंता जलदाय विभाग रावतभाटा
राविलऔर चित्तौड़गढ़ के एक्सईएन को बुलाया रावतभाटा
^नगरपालिकाद्वारा आईएचएसडीपी में बनाई गई दोनों टंकियां और बिछाई गई पाइप लाइन का लाभ लोगों नहीं मिल रहा है। इसके लिए राविल के एक्सईएन और जलदाय विभाग चित्तौड़गढ़ के एक्सईएन को 16 दिसंबर को रावतभाटा बुलाया गया है। दोनों अधिकारियों से वार्ता की जाएगी। लोगों को योजना का लाभ दिलाया जाएगा। राविल द्वारा पंपहाउस का निर्माण करा रहे हंै। -कृष्णपालसिंह चौहान, एसडीएमरावतभाटा
नहीं मिली स्वीकृति:जलदाय विभागने वर्ष 2020 तक शहर के विकास और आबादी बढ़ने के मद्देनजर नए प्रस्ताव भिजवाए थे, लेकिन उन प्रस्तावों को स्वीकृति नहीं मिली। जिसमें एक नया फिल्टर प्लांट, पंपहाउस, सीडब्ल्यूआर और चारभुजा, चर्च बस्ती में टंकी (उच्च जलाशय) के प्रस्ताव भिजवाएं थे। 2020 की जनसंख्या और शहर के विकास को देखते हुए 25 लाख लीटर पानी की अतिरिक्त आवश्यकता होगी। जो नए पंपहाउस, फिल्टर प्लांट और डब्ल्यूआर बनने के बाद ही प्राप्त की जा