एकीकरण की शिकायतों का लगा अंबार
एकीकरणको लेकर जिले के शिक्षा विभाग में शिकायतों का अंबार लगने लगा है। अब तक शिक्षा विभाग को 108 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं।
इन खामियों को दूर करने का शिक्षा विभाग ने रास्ता निकाल लिया है। इसके लिए जिला एवं ब्लाॅक स्तर पर कमेटियों का गठन कर लिया है। कमेटियां 15 सितंबर तक रिपोर्ट तैयार करेंगी। 14 अगस्त को जारी सूची के अनुसार जिले में 2258 में से 471 स्कूल एकीकरण दायरे में आए थे। 381 स्कूलों में 471 स्कूल मर्ज हुए थे। उमावि श्रेणी के 119 में 173, मावि श्रेणी के 201 में 227, उप्रावि श्रेणी के 44 में 49 एवं प्रावि श्रेणी के 17 में 22 स्कूल को मर्ज किया गया। तत्काल प्रभाव से एकीकरण के अनुसार संचालन करने के निर्देश भी जारी कर दिए थे, लेकिन एकीकरण में कई विसंगतियां होने के कारण जिले के कई स्कूल अभी भी पहले जैसी व्यवस्था के तहत ही चल रहे हैं तो कुछ गांव के लोग मर्ज होने वाले दूसरे गांव के स्कूल में बच्चों को भेजने को तैयार नहीं हैं।
आए दिन स्कूल को एकीकरण से मुक्त करने या यथावत स्थिति रखने की मांग के संबंध में डीईओ प्रारंभिक, माध्यमिक एवं जिले के सभी बीईईओ कार्यालय में शिकायतें पहुंच रही हैं। अधिकांश जगह एकीकरण के विरोध में स्वर गूंज रहे हैं। डीईओ प्रारंभिक कन्हैयालाल रैगर के अनुसार गठित जिला स्तर की कमेटी में सीईओ अध्यक्ष, डीईओ माध्यमिक एवं प्रारंभिक सदस्य तथा ब्लाक स्तर की कमेटी में एसडीएम अध्यक्ष, बीईओ माध्यमिक का नोडल अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटियां 15 सितंबर तक शिकायतों का निस्तारण की रिपोर्ट तैयार करेंगी तथा 19 को फाइनल रिपोर्ट शिक्षा विभाग के निदेशालय भेज दी जाएगी।
इसलिएरही खामियां
एकीकरणके तहत स्कूलों काे मर्ज करने की सूची ब्लाॅक लेवल के अधिकारियों ने आनन-फानन में बनाई थी। इसमें केवल दूरी को ही फोकस किया था। इस कारण एकीकरण की सूचियां जारी होने के बाद खामियां सामने आई। विभाग के अधिकारियों के अनुसार उक्त सूची तैयार करने में जितना समय चाहिए था, उतना नहीं मिला।
नहींकरना पड़ेगा नदी-नाला पार
जिलेमें एक स्कूल से दूसरे में मर्ज होने वाले ऐसे स्कूल या ऐसे गांव के बच्चे जो दूसरे गांव में स्कूल मर्ज होने के कारण पढ़ने जा रहे हैं, लेकिन बीच में नदी, नाला, रेलवे लाइन राष्ट्रीय राजमार्ग पड़ता है। वहां बच्चों को परेशान या जानजोखिम में नहीं पड़े ऐसे स्कूलों की सू