कक्षाएं 17, कमरे 12, कहां बैठें बच्चे
रावतभाटा बालिका स्कूल में कमरों की कमी के कारण गैलरी में बैठे स्टूडेंटस। स्कूल में 3 स्कूलों का एकीकरण किया गया है। जिसके कारण कमरों की कमी हो गई है। यहां 17 कक्षाएं है और 12 कमरे।
भास्कर न्यूज. रावतभाटा
एकीकरणसे शिक्षकों की कमी तो कुछ हद तक दूर हो गई है, लेकिन कमरों की कमी से एकीकरण किए गए आदर्श स्कूलों का हाल बेहाल है। रावतभाटा क्षेत्र के सबसे बड़ी सीनियर सैकंडरी बालिका स्कूल में कक्षा 1 से 12 तक में कुल 17 कक्षाएं हंै, लेकिन कमरे सिर्फ 12 हैं। एकीकरण से टीचरों की संख्या 21 हो गई है, मगर इसके बावजूद व्याख्याताओं की कमी बनी हुई है।
रावतभाटा बालिका सीनियर सैकंडरी स्कूल में नवीन और पुराना बालिका स्कूल को मिलाया गया था। जिसके बाद सीनियर सैकंडरी स्कूल में स्टूडेंट्स की संख्या 666 हो गई है। इसमें 11 शिक्षक और 167 स्टूडेंट्स दोनों स्कूलों से आए हैं।
सीनियर सैकंडरी स्कूल में पहले से ही 10 शिक्षक हंै। यहां 499 बालिकाएं पहले से अध्ययनरत थी। सीनियर सैकंडरी बालिका स्कूल का भवन दो मंजिला है। जिसे परमाणु बिजलीघर के सामाजिक सरोकार के तहत बनाया गया है।
स्कूल प्रिंसिपल पूनम भटनागर का कहना है कि परमाणु बिजलीघर के अधिकारियों से सामाजिक सरोकार के तहत और भवन बनाने का अनुरोध किया जाएगा। शामिल किए गए स्कूलों में 53 लाख रुपए का प्रस्ताव स्वीकृत हो चुका है, इसे बालिका स्कूल में इस्तेमाल करने के लिए अनुरोध किया जाएगा। सीनियर सेकंडरी स्कूल में नगरपालिका का हॉल अधूरा बना हुआ है। यदि यह हॉल बन जाए तो कुछ कमरों की व्यवस्था इसमें हो सकती है। हालही में नगरपालिका ने इसका टेंडर किया था, लेकिन बाद में यह निरस्त हो गया।
गैलरीमें जमीन पर बैठे बच्चे
रावतभाटासीनियर सेकंडरी स्कूल में कमरों की कमी होने के कारण गैलरी में बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। यह पहली और दूसरी कक्षा के कक्षा के बच्चों को एक साथ बिठाया जा रहा है। स्कूल प्रिंसिपल का कहना है कि कमरों की कमी है, इसलिए अभी व्यवस्था बिठाई जा रही है।
एकीकरणके बाद बालिका स्कूल में बढ़ रहे हैं बालक
सरकारने भले ही एकीकरण कर शिक्षा व्यवस्था का सुधारने का दावा किया हो, लेकिन रावतभाटा का सबसे बड़े सीनियर सेकंडरी बालिका स्कूल में विचित्र स्थिति है। यहां के स्कूलों में बालिकाओं के साथ एकीकरण में बालक भी गए है। हालांकि यह कक्षा 1 से 5 तक