पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • बंगाली समाज ने की मां सरस्वती की पूजा

बंगाली समाज ने की मां सरस्वती की पूजा

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
रावतभाटा शहर के हृदयस्थल मानव मंदिर प्रांगण में सार्वजनिक दुर्गापूजा कमेटी की ओर से बंगाली समाज के लोगों ने बसंतपंचमी पर शिक्षा की देवी मां सरस्वती की पूजा अर्चना की। मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा की गई। इस अवसर पर समाज की महिलाओं एवं पुरूषों ने मां सरस्वती को मंत्रों के साथ पुष्पांजलि अर्पित की।

पूजा अर्चना पुजारी प्रदीप भादुड़ी ने कराई। पूजा अर्चना करने वालों में दुर्गा साहू, दीपा डे, मौसमी मुखर्जी, चमेली हलधर, शुक्लाभादुडी , अजंता हलधर, रितु पाल, सीता बैनर्जी, मीताशित,सुष्मिता कोमल, स्वागता सरखेल, रीति प्रधान, सुपर्णा देवनाथ, ज्योति बाहुल एवं समाज की महिलाएं, पुरुष, बच्चे शामिल थे।

सरस्वती पूजा के बाद दो छोटे नन्हें बच्चों ने पढ़ाई की शुरूआत हाथेखड़ी रस्म से की। जिसमें स्वात्विक, देवनाथ, अर्णव शामिल थे।

बसंतपंचमी पर हुआ काव्यपाठ, यज्ञ

रावतभाटा।आर्य समाज रावतभाटा की ओर से झालरबावड़ी चारभुजा में बसंत पंचमी पर्व मनाया गया। इस मौके पर शारदा साहित्य मंच के कवियों ने काव्यपाठ, यज्ञ किया। वीर हकीकत राय बलिदानी के जीवन की जानकारी दी गई। लांस नायक हनुमनथप्पा को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। हरियाणा के कमलआर्य ने भजन प्रस्तुत किए। रमेशचंद ने बसंत पंचमी के प्राकृतिक रूप के महत्व की जानकारी दी। रेशमपालसिंह ने मुझको नवल उत्थान दो मां सरस्वती वरदान दो, सुधा सिंह ने तेरी मेहरबानी का है बोझ इतना, उपमा त्यागी ने मेरे प्यारे वतन, दुनिया बनाने वाले, प्राणों का प्राण है तू गीत प्रस्तुत किया। योगेश आर्य ने बसंत को ऋतुओं का राजा बताया। प्रभारी कवि नाथुनपंडित ने मां, विक्रमसिंह ने मगर कहीं तो है वो, कमलआर्य ने मां पर जब हम भाई छोटे थे, तब भी लड़ते थे, मां मेरी है, मां मेरी है, मदनलाल ने बसंत पंचमी, लांस नायक हनुमनथप्पा को समर्पित रचना, मुख्य संरक्षक ओमप्रकाश आर्य ने मानव इसी को कहते है रचना प्रस्तुत की। विनोद त्यागी ने गायत्री मंत्र के साथ बसंत पंचमी पर विचार व्यक्त किए।

रावतभाटा। बंगाली समाज की आेर से मां सरस्वती की बसंत पंचमी पर पूजा करती महिलाएं

खबरें और भी हैं...