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किसान सेवा केंद्र तो बनाए जा रहे हैं कृषि पर्यवेक्षकों के पद पड़े हैं रिक्त

5 वर्ष पहले
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रावतभाटा। राज्यसरकार की ओर से पंचायत मुख्यालयों पर किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए किसान सेवा केंद्रों का निर्माण कराया गया है, लेकिन इन सेवा केंद्रों में कार्य करने और किसानों को नवीनतम तकनीक और योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए सहायक कृषि अधिकारी ही नहीं है। पंचायत समिति भैंसरोडगढ़ की 25 पंचायतों में से 12 पंचायत मुख्यालयों पर किसान सेवा केंद्रों का निर्माण कराया गया है। जबकि दो पंचायत मुख्यालयों पर भवन निर्माण कार्य जारी है। रावतभाटा उपखंड की 25 पंचायतों में 17 पद कृषि पर्यवेक्षकों के स्वीकृत है और 3 पद सहायक कृषि अधिकारियों के स्वीकृत है, लेकिन पूरे उपखंड में 4 कृषि पर्यवेक्षक, 1 सहायक कृषि अधिकारी कार्यरत है। क्षेत्र के किसानों को राज्य और केंद्र सरकार की योजनाओं और नवीनतम तकनीक की जानकारी पद रिक्त होने से नहीं मिल रही है। रावतभाटा उपखंड की अधिकांश पंचायत माडा योजना में चयनित है, चंबल नदी, ब्राह्मणी नदी से सटा यह इलाका कृषि उत्पादन में भी आगे है। कुंडाल क्षेत्र धनिया, ज्वार, सोयाबीन की अच्छी पैदावार के लिए जाना जाता है। इसके बावजूद भी कृषि विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में ध्यान नहीं दे रहे है। जिससे क्षेत्र में उपज प्रभावित हो रही है।

उपखंडक्षेत्र में यहां बने हंै किसान सेवा केंद्र

पंचायतसमिति भैंसरोडगढ़ की बड़ौदिया, जालखेड़ा, खातीखेड़ा, एकलिंगपुरा, जवाहरनगर, देवपुरा, जावदा, श्रीपुरा, बोराव, तंबोलिया, गोपालपुरा, मंडेसरा में किसान सेवा केंद्र बनाए गए। जिन पर प्रत्येक भवन पर 9 लाख की राशि खर्च की गई। भैंसरोडगढ़, राजपुरा में भवनों का कार्य जारी है। प्रत्येक भवन पर 10.50 लाख की राशि खर्च होगी।

यहां नहीं है भवन धांगणमऊकलां, बाड़ौलिया, झरझनी, धावदकलां, रेनखेडा़, बरखेड़ा, बलकुंडीकलां, टोलों कालुहािरया , लुहारिया, झालरबावड़ी, बस्सी में किसान सेवा केंद्र नहीं है। कृषि पर्यवेक्षक 4 तंबोलिया, मंडेसरा, रावतभाटा, बड़ौदिया में लगाए गए है।

आतीहै समस्याएं

उपखंडक्षेत्र में चल रहे रिक्त पदों के कारण किसानों को खरीफ, रबी की फसल से पूर्व बीज, उपचार, फसल में डाली जाने वाली खाद की मात्रा, बुवाई से पूर्व कितनी पिलाई, पौधा अंकुरित होने के बाद सिंचाई, पौधों को दी जाने वाली संतुलित खाद की मात्रा सहित कृषि कार्यों की जानकारी नहीं मिल रही है। ऐसी स्थिति में किसान पुरानी तकनीक से खेती कार्य करने को मजबूर है।

ऑनलाइनका भी नहीं मिल रहा लाभ केंद्रएवं राज्य सरकार उपज बढ़ाने के लिए किसानों को नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराने की बात कहती है और राज्य सरकार, केंद्र सरकार से मिलने वाली सभी अनुदान की योजनाओं को ऑनलाइन कर दिया है। क्षेत्र में कृषि पर्यवेक्षकों, सहायक कृषि अधिकारियों के पद रिक्त होने से किसानों को अनुदान की योजनाओं की जानकारी नहीं मिलने एवं ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाने से योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ता है। उपखंड में पद रिक्त होने से सरकार की ओर से रबी, खरीफ फसलों की नवीनतम जानकारी देने के लिए प्रदर्शनी से भी वंचित रह जाते है। प्रदर्शनी में मिलने वाले निशुल्क खाद, बीज का भी लाभ नहीं मिल पाता।

कृषिअधिकारी के पद भी रिक्त

बेगूंमें कृषि अधिकारी के दो पद स्वीकृत है। जो भी रिक्त है। इसके अलावा एक पद सहायक निदेशक का है। जिसका भी अतिरिक्त चार्ज चित्तौडगढ़ के सहायक निदेशक के पास है। जिस कारण क्षेत्र के किसानों को योजनाओं का समय पर लाभ नहीं मिल रहा।

^रावतभाटा,बेगूं उपखंड में कृषि विभाग के एक सहायक निदेशक थे। जो भी सेवानिवृत्त हो गए है। अब रावतभाटा उपखंड में मात्र 5 कर्मचारी है। कृषि विभाग की योजनाओं के साथ राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का भी कार्य करना पड़ रहा है।

धनपालसिंहसहायककृषि अधिकारी भैंसरोडगढ़

रावतभाटा। ऐसे बने हुए हंै किसान सेवा केंद्र, लेकिन नहीं है पर्यवेक्षक।

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