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लोगों में डर दूर करने के लिए जारी रहे जागरूकता अभियान

7 वर्ष पहले
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रावतभाटा। भारीपानी संयंत्र से किसी भी प्रकार का खतरा नहीं है, लेकिन केमिकल संयंत्र होने के कारण यहां पर एच-टू-एस गैस का खतरा माना गया है। ऐसे में इमरजेंसी हालात बन सकते हैं। इसके लिए सरकार ने पूरे प्रबंधन किए हैं, लेकिन आम लोगों में डर और भ्रांतियां दूर करने के लिए भारी पानी संयंत्र प्रबंधन को निरंतर जागरूकता अभियान जारी रखना चाहिए। यह बात कोटा कमिश्नर एवं ऑफ साइट इमरजेंसी रेस्पॉन्स कोर्डिनेशन कमेटी अध्यक्ष ओंकार सिंह ने रावतभाटा हैवीवाटर गेस्टहाउस में आयोजित बैठक में कही। कमिश्नर ने सभी अधिकारियों को कहा कि वह अपनी अपनी जिम्मेदारी को समझ लें। इमरजेंसी हालात में समन्वय की कमी नहीं दिखनी चाहिए। इमरजेंसी हालात में समय का महत्व होता है। भारी पानी संयंत्र के जीएम वीपी नेमा ने ऑफ साइट इमरजेंसी प्लान की जानकारी दी। डिप्टी जीएम जितेंद्र श्रीवास्तव ने उत्पादन, संरक्षा, वरिष्ठ संरक्षा अभियंता एसबी सिंह ने ऑफ साइट इमरजेंसी रिस्पोंस कोर्डिनेशन कमेटी के सदस्यों के उत्तरदायित्व और अभ्यास के दौरान अनुमानित परिदृश्यों के बारे में जानकारी दी। राजस्थान परमाणु बिजलीघर के स्थल निदेशक एसके शर्मा, परियोजना निदेशक बीसी पाठक ने परमाणु बिजलीघर से संबंधित शंकाओं एवं आपात परिस्थितियों में संरक्षा के प्रबंधनों की जानकारी दी। बैठक में कोटा आईजी डॉक्टर रविप्रकाश, कोटा कलेक्टर जोगाराम, सीआईएसएफ सहायक कमांडेंट नीलम सहारन, एसडीएम कृष्णपाल सिंह चौहान, कोटा हेल्थ डिप्टी डायरेक्टर हेमेंद्र विजयवर्गीय, एएसपी गोपालसिंह कानावत, सिविल डिफेंस के आरडी चौधरी, जेएस चुंडावत, तहसीलदार गौरीशंकर शर्मा, ब्लॉक सीएमओ डॉक्टर जीजे परमार, एसडीओटी एसके वर्मा, आरएपीपी के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर डीएस कथुरिया, प्रशासनिक अधिकारी हरिहरनपी अय्यर, डीएसपी भरतलाल मीणा, सीआई कमल प्रसाद मीणा, डॉक्टर एस गणेशन, सीआईएसएफ इंस्पेक्टर बीएस राठौड़, पटवारी ललितकुमार टेलर मौजूद थे। संचालन रोमा गर्ग ने किया। आभार संरक्षा एवं पर्यावरण अधीक्षक एम चंद्रमोली ने जताया।

रावतभाटा। बैठक को संबोधित करते संभागीय आयुक्त ओंकारसिंह।