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डूब विस्थापितों के लिए बन रहे घर छोटे, परिवार बड़े, कैसे होगा गुजारा
केंद्रहो या राज्य सरकार चुनाव में घर का सपना सच करने के नाम पर ही वोट लेती हंै, लेकिन शहर में विचित्र स्थिति देखने को मिल रही है। इनके लिए सरकार आशियाने बना रही है वह वहां रहना ही नहीं चाहते। इसका कारण यह नहीं है कि जहां घर बन रहे है वह कोई सुनसान इलाका हो या फिर सुविधाओं की कमी हो।
वर्तमान में पॉश इलाके बालाजी नगर के पास ईदगाह के सामने 393 मकान बनाए जाने की योजना पर काम चल रहा है। इस परियोजना में 1322.85 लाख रुपए खर्च होंगे। इसमें पहले चरण में 200 घर बन रहे हंै। इसमें सिर्फ उपभोक्ता को 10 प्रतिशत सहयोग राशि देनी है। एक घर की लागत लगभग 3 लाख रुपए आएगी। यानी सिर्फ 30 हजार रुपए में एक परिवार को घर मिलेगा। इस योजना में चारणबस्ती का डूबक्षेत्र, विक्रमनगर कच्चीबस्ती का वनक्षेत्र, चामला के पास तेंदुआ बस्ती के डूब में रहे घरों को लेकर यह योजना बनाई गई थी, लेकिन इस मामले में जब नगरपालिका ईओ ने बस्ती के लोगों से पूछा तो, अधिकांश लोग इन घरों में नहीं आना चाहते।
लोगोंने कहा-खुले में जहां रह रहे वहीं खुश
लोगोंका कहना है कि घर की साइज छोटी है। उनका परिवार बड़ा है। ऐसे में वह खुले में ही जहां रह रहे है वहीं खुश है। साथ ही उनका यह भी कहना है कि उन्होंने अपना घर बनाने में भी राशि लगा रखी है। कईयों ने तो, 5 से 10 लाख रुपए मकानों में खर्च कर रखें है।
रावतभाटा। बालाजी नगर में निर्माणाधीन नए मकान, जो डूब में रही बस्ती के लोगों को बसाने के लिए बनाए जा रहे हैं।
रावतभाटा। विस्थापितों के मकानों की सूचना पट्ट पर दी गई जानकारी।