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कर्म सही होंगे तो मंजिल जरूर मिलेगी

6 वर्ष पहले
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रावतभाटा। महाशिवपुराण कथा में जूना अखाड़ा हरिद्धार की महामंडलेश्वर मैत्रेय गिरी संबोधित करते हुए एवं कथा वाचक हेमा सरस्वती

गणेशगंज. शिवमहापुराण कथा में वाचन करते मन्नानाथ योगी।

भास्कर न्यूज | गणेशगंज

रनोदियागांव में संगीतमय शिव महापुराण कथा का कार्यक्रम जारी है। जिस में गुरूवार को हुई कथा में कथा वाचक मन्ना नाथ योगी ने श्रद्वालुओं से कहां कि अगर हमारे कर्म सही होगेतो मंजिल जरूर मिलेगी।

ऐसे में हमंे सच्चाई के मार्ग पर चलकर आगे बढ़ना चाहिए। कभी किसी को भी कम नही आंकना चाहिए। वही जीवन में फिजूल खर्ची दिखावे की प्रवृति से बचना वर्तमान समय की माँग है। हर परिवार में बच्चे संस्कारवान बने और धर्म की गंगा बहे तो देश की तरक्की की रफतार और भी तेज होगी। पाश्चात्य संस्कृति का बहिष्कार करने के लिए सदैव तत्पर रहे। योगी ने कहां कि आज हम बहार से संपन्न होते जा रहे है। अंदर से बिल्कुल खोखले होते जा रहे है। हम चंाद पर पहुंच गय है। पड़ौसी की तबीयत देखने के लिए हमारे पास वक्त नही है। आज इंसान-इंसान से दूर होता जा रहा है। अपने जीवन की सफलता के लिए हर दिन यह विचार करे की मेरी जिदंगी के केवल 24 घटे ही बाकि है। मुझे केवल 24 घटे ही जीवित रहना है। तो हम किसी का दिल नही दुखाएगें। काम, कोध,लोभ,मोह, अंहकार आदि विकारों में रहकर कोई कार्य नही करेगे। जो कुछ भी हमारे पास उपलब्ध है उसे तन मन धन से सफल करेगे। योगी ने कहां कि मनुष्य को मीठा और कम बोलना चाहिए। हम जीतना कम, और मिठा, धीरे और सोचकर बोलेगे उतना ही दूसरो पर उस का प्रभाव अधिक पड़ता है। उन्होने कहां कि इंसान के मुंह से निकला हुआ शब्द और बंन्दूक से निकली गोली कभी वापस नही आती ऐसे में दोनो का प्रयोग करते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए।

सभीमां में गोमाता का दर्जा सबसे ऊंचा

मन्नानाथयोगी ने कहां कि मां नौ प्रकार की होती है। जिस में गौमाता का दर्जा सबसे ऊपर है। माँ के अंदर 36 करोड़ देवताओं का निवास है। कहां कि गौ मूत्र गंगा के पानी से भी पवित्र माना गया है। गौमाता का मूत्र-गोबर-दूध आदि से रोग निदान होते है। पुरूषों एंव युवतियों को आदि अर्दनगन कपड़े नही पहनना चाहिए। इस में मानपेंसियों में दबाव बनाता है।मनुष्य को व्यसन मुक्त होना चाहिए। कथा के बाद महाआरती का आयोज किया गया।

मोहऔर अभिमान से होता है क्लेश और दुख

रावतभाटा।मुक्तेश्वर महादेवालय एनटीसी में महाशिवपुराण कथा में कथा वाचक हेमानंद सरस्वती ने गोस्वामी तुलसीदास के रचे दौहे को उजागर करते हुए कहा कि मोह, अज्ञान और अभिमान के वशीभूत मनुष्य का जीवन हमेशा क्लेश, दुख और दर्द से भर जाता है। इसी अवस्था में संत समागम और हरिकथा ही मनुष्य को शांति प्रदान करती है। उन्होंने रामचरित्र मानस पर चर्चा करते हुए कहा कि श्रद्धारूपी पार्वती और विश्वासरूपी शंकरजी की तरह दाम्पत्य जीवन होना चाहिए। उन्होंने शिव बारात की सजधज से लेकर शिवजी के विवाह तक का वर्णन किया। उन्होंने शिवनारद संवाद, विवाहकथा सुनाते हुए भावपूर्ण भजन गाए, जिसमें श्रद्धापूर्वक श्रद्धालु झूम उठे। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि समर्पण का नाम ही बेटी है, बेटा वंश तो, बेटी अंश होती है। इस मौके पर भगवान पार्वती मां की विदाई का भावभीना वर्णन किया तो, श्रद्धालुओं की आंखे भर आई। शिवपार्वती के कैलाश वास की कथा, उमा द्वारा पूर्व जन्म की रामकथा का पुर्न सुनना, ताड़का सुर के वध हेतु देवताओं की शिव स्तुति, कार्तिकेय, गणपति के प्रगटय की कथा सुनाई गई। कार्तिकेय स्वामी और गणेश की परिक्रमा पर चर्चा करते हुए कहा कि माता, पिता की सेवा, पूजा, सबसे श्रेष्ट है। इस मौके पर जूना अखाड़ा हरिद्वार की मैत्रेय गिरिजी महाराज ने कहा कि कथा का श्रवण करना भी पुण्य है। उन्होंने विष्णु, नारद संवाद से संत दर्शन के फल को समझाया।

सदगुणोंसे विरोधियों को भी बना सकते हैं अपना

रावतभाटा।एकलिंगपुरा में श्रीराम कथा में कथा वाचक मां स्वयंप्रभा कृष्णसखी ने शिव से संबंधित धार्मिक प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि चाहे तो, शिव से प्रेरणा लेकर अपने व्यक्तित्व को निरंहकारी बनाए। जैसे शिव ने विषैले सर्प को गहना बनाकर अपने गले में डाल रखा है। इसी प्रकार मनुष्य दुश्मन को भी अपने सदगुणों से अपना बना सकते है। कथा में शिव पार्वती विवाह धूमधाम से मनाया गया। कथा खेतड़ी गौशाला के संस्थापक रामचरणदास महाराज के सानिध्य में चल रही है। आरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया। भजनों पर श्रद्धालु भावविभाेर होकर नृत्य करते रहे।

रावतभाटा। महाशिवपुराण कथा में मौजूद श्रद्धालु।