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15 से कम नामांकन के 9 स्कूलों को भूले मर्ज करना

5 वर्ष पहले
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रावतभाटा।बन्ना का खेड़ा स्कूल। यहां महज 14 बच्चो का ही नामाकंन है।

भास्कर न्यूज|रावतभाटा

क्षेत्रमें 15 से कम नामांकन वाले 9 स्कूलों को शिक्षाविभाग लगता है भूल गया। आरटीई मापदंडों के अनुसार 15 से कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करना था। इसके बावजूद 9 स्कूल संचालित हो रहे हैं।

इनके मर्ज करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। जून और अगस्त में कुल पांच अलग-अलग आदेशों में जिले में 80 स्कूलों को मर्ज किया गया था। अब फिर निदेशालय ने आरटीई नियमों के तहत स्कूलों को मर्ज करने के आदेश जारी किए हैं। इससे रावतभाटा के 9 स्कूल मर्ज होंगे। भास्कर ने पड़ताल की तो पाया कि विभाग इन 9 स्कूलों में से कुछ को तो पहले चिह्नित करना भूल गया। दूसरा कारण यह भी सामने आया कि इन स्कूलों में नामांकन कम हो गया है। सरकार की मंशा है कि कम नामांकन वाले स्कूलों में लगे शिक्षकों का सदुपयोग हो। प्रदेश में वर्तमान में शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हैं। ऐसे में कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने का तरीका अपनाने का निर्णय लिया है। प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक श्रेणी के ऐसे स्कूल जिनमें शून्य से 15 तक तथा ऐसे उप्रावि जिनमें नामांकन 30 तक है, ऐसे स्कूलों की सूचना भी मांगी है।

विभागने कहा-आबादी कम

चित्तौड़गढ़जिले में प्राथमिक श्रेणी के 67 एवं दो उप्रा श्रेणी के स्कूलों में 30 या इससे कम नामांकन होने के पीछे निदेशालय ने कारण भी मांगा है। इसमें प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने अधिकतर स्कूलों के गांवों में जनसंख्या कम होने की सफाई दी है।

ये9 स्कूल भूल गए अफसर

भैंसरोडगढ़पंचायत समिति के जयनगर, बंबोरीकलां शिक्षाकर्मी, सेमलिया शिक्षाकर्मी, प्राथमिक स्कूल बालागंज, सिंघाडिया, बन्ना का खेड़ा, गुडाखेड़ा शिक्षाकर्मी, भीमपुरा, नासेरा में 15 से कम बच्चे नामांकित हैं।

यहभी होगा फायदा: पहलीप्राथमिकता स्कूलों में पढ़ाई का माहौल तैयार करना है। प्राथमिक शिक्षा पर ध्यान देने से उच्च शिक्षा पर इससे असर होगा। स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग कर उसमें सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।

^रावतभाटा के 9 स्कूलों को मर्ज किया जाएगा। इसमें 15 से कम नामांकन हैं। कम नामांकन मय कारणों के प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय को भिजवाए जा रहे हैं। मैंने हाल में यहां ज्वॉइन किया है नामांकन किस कारण से कम हुए, इसके बारे में पता लगाया जाएगा। जगदीशचंद्रपालीवाल, डीईओ (प्रारंभिक)

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