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जांभाणी हरिकथा में ऊमा बाई के भरे गए भात का प्रसंग सुनाया

5 वर्ष पहले
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रावतसर| चैरासीलाख योनियों के बाद इंसान को मनुष्य का जन्म मिलता है अगर इंसान को अपने जीवन-मरण के बंधन से छुटकारा पाना है तो मानव जन्म में इंसान को भक्ति का सहारा लेकर इस बंधन से छुटकारा पाना चाहिए, नहीं तो इंसान इस जीवन-मरण के बंधन से कभी मुक्त नहीं हो सकता। यह वाक्य कस्बे के वार्ड नंबर 24 स्थित जाम्भाणी हरिकथा के दौरान कथा वाचिका सिद्वी बिश्नोई ने कहे। वहीं कथा में गुरु जम्भेश्वर के द्वारा रोटुनगरी में ऊमा बाई के भरे गए भात के बारे में बताया गया। इस मौके पर मैनावाली, बलौचावाला, थिराजवाला, पिचकराई, लिखमीसर, शेरेका सहित आसपास चको ढाणीयों से भारी संख्या में श्रद्वालुओं की भीड़ रही है। वहीं सोमवार रात्रि जागरण मंगलवार सुबह हवन भंडारा के साथ इस सात दिवसीय जांभाणी कथा का समापन होगा।

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