भगवती की उम्मीदों को लगे पंख, अब फिर से दौड़ सकेगी
जिलेके छोटे गांव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की खेलकूद प्रतियोगिताओं में राजस्थान का नाम रोशन करने वाली एथलीट भगवती मेघवाल अब फिर से दौड़ सकेगी। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण खेल और पढ़ाई से दूर होने वाली इस प्रतिभा को पाली जिले के एक स्वयंसेवी संगठन ने गोद लिया है। जागरूक वेलफेयर सोसायटी कोसेलाव (पाली) की स्वयंसेवी संस्था ने पिछले माह दैनिक भास्कर में प्रकाशित भगवती की मार्मिक स्टोरी को पढ़कर यह निर्णय लिया था। शनिवार को जागरूक वेलफेयर सोसायटी के संरक्षक सुरेंद्र परमार टीम सहित नागाणी गांव पहुंचे। जहां मेघवाल को पांच हजार रुपए की नकद आर्थिक सहायता के साथ गोद लेने का प्रमाण पत्र सौंपा। एनजीओ संरक्षक सुरेंद्र परमार ने बताया कि संस्था अध्यक्ष महेंद्र परमार के निर्देश पर भगवती को उनकी संस्था ने गोद लिया है। इसके तहत भगवती के परिजनों को हर माह पांच हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी तथा उसकी आगे की पढ़ाई, खेल प्रशिक्षण और खेलों में भाग लेने तक का पूरा खर्चा भी उनकी संस्था द्वारा वहन किया जाएगा। इस मौके नागाणी के पूर्व सरपंच नारायण सिंह, भगवती की माता ऊनी देवी सहित परिजन मौजूद रहे।
भास्कर ने उठाया था मुद्दा
भगवतीकी इस मार्मिक दस्तां को सबसे पहले दैनिक भास्कर ने सामने लाया। भास्कर ने 21 जनवरी को कभी उड़नपरी की तरह दौड़ती थी, आज मजदूरी करती है नेशनल खिलाड़ीज् शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद अगले ही दिन पाली की यह स्वयंसेवी संस्था नागाणी गांव पहुंची और भगवती को गोद लेने का प्रस्ताव रखा था। साथ ही कार्मिक खेल विभाग की सचिव मालती चौहान ने भी उनके विभागीय कर्मचारियों को नागाणी भेजा था। उन्होंने भी भगवती को संविदा पर खेल कोच बनाने का प्रस्ताव रखा था।
अगले शिक्षा सत्र से पढ़ाई शुरू करेगी भगवती
पहलीबार आर्थिक सहायता मिलने के साथ ही हर माह यह आर्थिक सहायता की घोषणा से भगवती के कंधों से घर की जिम्मेदारी का बोझ काफी हल्का हो गया है। भगवती ने बताया कि पढ़ाई और खेल छूटने का मुख्य कारण घर की जिम्मेदारी का बोझ था। ऐसे में अब वह अगले शिक्षा सत्र से पढ़ाई शुरू करेगी। भगवती ने 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी, अब वह कॉलेज की पढ़ाई करेगी। साथ ही खेलकूद की तैयारी में भी जुट जाएगी।
{जिले के नागाणी गांव निवासी भगवती मेघवाल एथलीट है। उसने जिला स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में 100 मीटर से लेकर 3000 मीटर तक की दौड़ में कई गोल्ड मैडल जीते।
{वर्ष 2005 से लेकर 2008 तक वह 600,800,1500 और 3000 मीटर में वह राज्य स्तर पर भी टॉप रही।
{राष्ट्रीय महिला खेलकूद प्रतियोगिता में 600,800,1500 और 3000 मीटर में भी वह चैम्पियन बनीं। वर्ष 2007 में तमिलनाडु में आयोजित राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 3000 मीटर रीले दौड़ में चैम्पियन बनने के बाद वह खेल का आगे जारी नहीं रख सकी।
{पहले पिता, फिर भाई और भाभी की मौत तथा इकलौता भाई बीमारी में जकड़ जाने के बाद घर की जिम्मेदारी का बोझ आने से उसका खेल और पढ़ाई छूट गई।
एनजीओ ने भगवती को आर्थिक सहायता के साथ गोद लेने का प्रमाण पत्र दिया।