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फर्जी स्प्रिट परिवहन मामले में पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी उनके बेटे ने किया सरेंडर

7 वर्ष पहले
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श्रीमाधोपुर. रींगसके एचएसबी एग्रो इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड से फर्जी परमिट पर एक लाख 20 हजार बल्क लीटर स्प्रिट ले जाने के मामले में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी एवं उनके पुत्र संजय चौधरी सहित दो अन्य डायरेक्टरों ने एसीजेएम द्वितीय न्यायालय में सरेंडर किया है। आबकारी सीआई घनश्याम शर्मा ने बताया कि मामले में कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल चित्तौड़गढ़ बड़ी सादड़ी के पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी उनके बेटे एवं अन्य के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज प्रकरण में श्रीमाधोपुर न्यायालय की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी था। शुक्रवार को पूर्व विधायक उसके बेटे सहित मंदसौर निवासी हरीश विजयवर्गीय तथा कोमल बाफना ने भी सरेंडर किया है। सीआई शर्मा ने बताया कि पूछताछ के लिए चारों को एक दिन के रिमांड पर लिया गया है। शेष| पेज 4







गौरतलबहै कि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल कार्यकारी निदेशक उदयपुर निवासी ललित सुवालका ने भी पिछले दिनो कोर्ट के समक्ष सरेंडर किया था। बाद में एडीजे न्यायालय ने जमानत मंजूर कर ली थी।



दो साल से फरार चल रहे थे पूर्व विधायक

रींगस की एचएसबी एग्रो इंडस्ट्रीज प्रालि अजीतगढ़ की एग्रो बायोटेक डिस्टलरी से फर्जी परमिट पर मेघालय स्प्रिट का परिवहन किया गया था। परमिट की जांच की गई तो फर्जी पाए गए। इस पर इस पर एसएचएसबी एग्रो इंडस्ट्रीज के तत्कालीन प्रभारी सहायक आबकारी अधिकारी ललित मोहन ने जून 2011 में निदेशक मंडल में शामिल पूर्व विधायक प्रकाश चौधरी सहित 23 जनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत स्प्रिट को खुर्दबुर्द करने का मामला दर्ज कराया था। बाद में दोनों डिस्टलरी पर 40 करोड़ का जुर्माना लगाया गया। मामले में पूर्व विधायक उसके पुत्र संजय चौधरी सहित अन्य आरोपी फरार चल रहे थे।