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प्रकाशोत्सव पर गुरुद्वारे में हुआ अटूट लंगर, दीवान सजाया

7 वर्ष पहले
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महीनेभर व्रत के बाद चंबलघाट पर दीपदान

रावतभाटा. कलतारण गुरूनानक आया हिन्दू मुसलमान निवाया, सतगुरु नानक प्रगटया, मिटी धुंध जग चानण होया, सिखों के प्रथम गुरु, श्री गुरु नानक देवजी महाराज के प्रकाशोत्सव पर गुरुद्वारा सिंह सभा रावतभाटा में गुरुवार सुबह अखंड पाठ की समाप्ति हुई। इस अवसर पर खुले दरबार में दीवान सजाया गया। गुरुद्वारा सिंह सभा कमेटी के प्रधान मनप्रीतसिंह ने बताया कि गुरु नानकदेवजी ने समाज में सच्चा सौदा कर कुरीतियों एवं अंधविश्वासों को दूर किया। इस अवसर पर बताया गया कि गुरुनानक देव का जन्म उस समय हुआ, जब संसार के लोग गलत दिखावे वाले भ्रमों में पड़े हुए थे। उस निरंकार के हुक्म से गुरुनानक जी का प्रकाश हुआ। गुरुनानक जी ने एक निरंकार से सभी को जोड़ा। वहीं दोपहर बाद गुरु का अटूट लंगर बरता जिसमें लोगों ने बड़ी श्रद्धा से प्रसाद चखा। इस अवसर पर गुरुद्वारे को आकर्षक विद्युत सज्जा कर सजाया गया। ज्ञानी सतनाम सिंह ने गुरु नानकदेवजी के जीवन की जानकारी दी। कोटा का रागी जत्था भाई जसवीर सिंह ने शबद कीर्तन प्रस्तुत किया। बाबा शेरसिंह, निहंग सिंह ने कथा और कीर्तन प्रस्तुत किया। इस मौके पर हरलीन कौर, गुलशील, जसमीत ने कीर्तन प्रस्तुत किया। अरदास की गई। प्रसाद वितरण किया। कार्यक्रम में सरदार तारूसिंह, डॉक्टर डीएस कथुरिया, इंदरसिंह, मनप्रीतसिंह, उपप्रधान हिम्मतसिंह, सचिव गुरुदेवसिंह, रणजीतसिंह ग्रेवाल, महेंद्रसिंह, लखबीरसिंह, जीवनसिंह, बलकार सिंह, जेएस कालरा, तारूसिंह, सुदर्शनसिंहबल, गुरूदेव सिंह, सतनाम सिंह, आईमगनानी, डाक्टर तीरथ सेवाराम, पपींदरसिंह, इकबाल सिंह, प्यारा सिंह धंजल, जेएस सोखी, मनोज मलिक मौजूद थे।

प्रकाशोत्सवमें उमड़ी श्रद्धा

रामगंजमंडी.गुरुनानकदेव जयंती पर प्रकाशोत्सव गुरुवार को मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारे में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रकाशोत्सव के तहत शहर में गतदिनों से ही विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजन किया जा रहा था। मंगलवार को नगर कीर्तन के बाद गुरुद्वारे में अखंड पाठ साहब शुरू किया गया था। इसका गुरु नानक जयंती पर गुरुवार को समापन किया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारे में दीवान सजाया गया। यहां सुबह 10 से साढ़े 12 बजे तक शबद कीर्तन हुआ। इसमें ज्ञानी जगजीतसिंह ने संगत को निहाल किया। इसके बाद गुरु का अटूट लंगर हुआ, जो शाम तक चला। इसमें सिख सम