आखिर, अंडरपास के लिए मिले 463 लाख
रामगंजमंडी| करीबएक साल के इंतजार के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने अंडरपास के लिए 4 करोड़ 63 लाख रुपए शुक्रवार को पीडब्ल्यूडी के खाते में जमा करवा दिए हैं। इससे शहर में अंडरपास बनने की उम्मीद जगी है।
शहर दिल्ली-मुंबई रेलवे लाइन से दो हिस्सों में बटा हुआ है। इससे लोगों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ती है। पूर्व में भाजपा के पिछले कार्यकाल में रेलवे ओवरब्रिज स्वीकृत हुआ था। तब इसका निर्माण कार्य तो शुरू हुआ, लेकिन आज तक पूरा नहीं हो सका। इस समस्या को देखते हुए कांग्रेस सरकार के समय शहरवासियों ने रामगंजमंडी नागरिक मंच बनाकर विकल्प के रूप में अंडरपास बनाने की मांग उठाई। इसके लेकर शहर में विभिन्न संगठनों ने आंदोलन भी किए। तब कांग्रेस सरकार ने अंडरपास को स्वीकृति दे दी। इसके लिए पांच करोड़ छह लाख रुपए का बजट प्रस्तावित किया गया। तब कांग्रेस सरकार ने नौ लाख रुपए अंडरपास के लिए जारी किए तो तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अंडरपास का शिलान्यास भी कर दिया। इसके बाद प्रदेश में सरकार बदल गई और अंडरपास भी अधर में हो गया। पालिका उपाध्यक्ष महेश श्रीवास्तव ने बताया कि अंडरपास की राशि के लिए विधायक चंद्रकांता मेघवाल भी प्रयासरत थी। इसके लिए गत दिनों वह मुख्यमंत्री वसुंधराराजे और पीडब्ल्यूडी मंत्री युनूस खान से मिली थी। इसके बाद शुक्रवार को 4 करोड़ 63 लाख रुपए सरकार ने पीडब्ल्यूडी के खाते में जमा करवा दिए गए हैं। श्रीवास्तव ने बताया कि अंडरपास के लिए पीडब्ल्यूडी चार करोड़ 72 लाख रुपए रेलवे को जमा कराएंगी। इसमें नौ लाख रुपए पहले ही मिल गए थे। शेष राशि अब मिल गई है। (वकीलोंका धरना पेज-18 पर)
रामगंजमंडी। अंडरपास की मांग को लेकर शुक्रवार को वकील अनशन पर बैठे।