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पालकियां मंदिर पहुंची, वागड़ महाकुंभ विदा

6 वर्ष पहले
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साबला। बेणेश्वरधाम पर चल रहा महाकुंभ का ध्वजावतरण के साथ सोमवार को समापन हुआ। पालकियां गाजे-बाजे के साथ बेणेश्वर से वापस साबला हरिमंदिर पहुंच गई।

भगवान श्रीकृष्ण के अंशावतार के रूप में पुज्य अलौकिक संत मावजी महाराज की लीलास्थली बेणेश्वर धाम पर चल रहा महाकुंभ संपन्न हो गया। धाम की प्रधान पीठ राधा-कृष्ण मंदिर से दोपहर शुभ मुहुर्त में गोस्वामी अच्युतानंद महाराज ने विधि-विधान से ध्वजावतरण कर समापन रस्म अदा की। अच्युतानंद महाराज ने बेणेश्वर धाम के पीठाधीश्वर संत मावजी महाराज सहित तमाम पीठाधीश्वरों को याद किया। अंतिम दिन राधा-कृष्ण मंदिर परिसर में साद भक्तों, निष्कलंक धामों के महंत, कोटवालों और श्रद्धालुओं का जमावड़ा बना रहा। विष्णु सहस्त्रनाम्ï के साथ देव-प्रतिमाओं के अभिषेक पूजा के विभिन्न अनुष्ठानों का क्रम बना रहा। चंद्रकांत फपोत, गुलाब खेमोत, कपिल फपोत, कुबेरकांत पाटीदार, गंगाराम खेमोत, पंकज बनोत, कांतिलाल फपोत, शशिकांत बनोत, लीलाराम फपोत, गणेश फपोत मौजूद थे।

धाम पर अच्युतानंदजी महाराज का तिलक लगाकर आशीर्वाद लेते भक्त।

पालकियां हरि मंदिर साबला पहुंची

राधा-कृष्णमंदिर में सुबह भगवान को केसर मिश्रित दुग्ध का भोग लगाया गया। गोस्वामी अच्युतानंद महाराज के दर्शनों के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। आसपास से आए भक्तों ने पवित्र स्नान के उपरांत मंदिर परिसर में बैठकर निष्कलंक भगवान की विशेष पूजा-अर्चना की। बाद में धर्म ध्वजाओं, ढोल-नगाड़ो, गाजे-बाजे एवं मावजी की जय-जयकार के साथ भक्त, महंत एवं निष्कलंक भगवान की पालकियों को लेकर साबला की ओर रवाना हुए। साबला पहुंचने पर गांव के मुख्य चौराहे पर ग्रामवासियों ने पालकी यात्रा की अगवानी की और पधरामणी की रस्म निभाई गई। जिसमें साबलावासियों ने कुमकुम, अक्षत, पुष्पहारों से निष्कलंक भगवान एवं महंत की पूजा की तथा शोभायात्रा के साथ उन्हें हरि मंदिर ले जाया गया।