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जयपुर की दो दीक्षार्थियों ने साबला में ली दीक्षा
रींछामें आयोजित पंचकल्याण प्रतिष्ठा महोत्सव में सोमवार को दीक्षा दिवस मनाया गया। इसमें भगवान की दीक्षा के साथ ही आचार्य सुनील सागरजी के सानिध्य में जयपुर की दो दीक्षार्थियों ने भी सांसारिक माया-मोह से विमुख होते हुए संयम को अंगीकार किया और दीक्षा ग्रहण की।
महोत्सव में भगवान की दीक्षा के साथ जयपुर की गायत्री देवी, सूरज देवी की दीक्षा भी हुई। संपन्न घरानों की इन महिलाओं की दीक्षा के पवित्र दृश्य को देखने के लिए पूरा पांडाल खचाखच भरा हुआ था। दीक्षा के मनोहारी दृश्य को देखकर और आचार्य के हृदय को छूने वाली वाणी सुनकर श्रद्धालु भावुक हो गए। दीक्षार्थियों के केशलोचन के समय बड़े-बूढ़े सभी लोग आनंद श्रद्धाभाव में दिखाई दिए। आचार्य ने एक पुस्तक का विमोचन भी किया। महोत्सव में रींछा जैन समाज अध्यक्ष शिखरमल जैन, महावीर जैन, बसंतलाल जैन, विनोद जैन, महेंद्रकुमार और कस्बे के साथ ही आसपास के और दूरदराज के क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
आचार्य सुनीलसागरजी महाराज ने कहा कि परमात्मा से मिलन ही दीक्षा है। त्याग-तपस्या की राह पर चलकर ही कोई मानव पूज्य बन सकता है। भोगों को भोगने से वासना शांत नहीं होती है, बल्कि सच्चे गुरु की बताई राह और संयम से भरा जीवन विरले लोगों को ही मिल पाता है। उन्होंने कहा कि जीवन का निचोड़ यही है कि व्यक्ति अपने कर्मों से महान होता है।
रींछा गांव में सोमवार को आयोजित पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव में दीक्षा ग्रहण कर बैठ दीक्षार्थी। वहीं दूसरी ओर महोत्सव में धर्मसभा को संबोधित करते अाचार्य सुनील सागरजी और अन्य संत।
रींछा गांव में सोमवार को आयोजित पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महत्सव में मौजूद वागड़, मेवाड़ के श्रद्धालु। वहीं प्रतिष्ठा महोत्सव के तहत आयोजित कार्यक्रम में श्रेष्ठ कला का प्रदर्शन करती जैन समाज की बालिकाएं।