स्वाइन फ्लू से घबराए नहीं, इलाज आसान
सागवाड़ा में चिकित्सा विभाग के नाकाफी इंतजाम
कातरवा गांव में 15 दिन में 4 की मौत
सागवाड़ा। क्षेत्रमें स्वाइन फ्लू की बीमारी एक महामारी का रूप ले रही है। चिकित्सा विभाग के पास इससे निबटने के सारे इंतजाम बौने साबित हो रहे है। आयुर्वेद विभाग की ओर से लगने वाले काढा वितरण शिविर में ग्रामीणों और स्कूली विद्याथियों की लगने वाली भीड़ इस बीमारी को लेकर लोगों की जागरूकता को बया कर रही है, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास वर्तमान में इस बीमारी की रोकथाम के नाम पर केवल टेमी फ्लू की दवा ही उपलब्ध है। स्थानीय स्तर पर इस बीमारी के इलाज के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं होने से लोगों को मजबूरी में अन्यत्र जगहों पर जाकर महंगी चिकित्सा सुविधा लेनी पड़ रही है। सागवाड़ा उपखंड़ स्तर पर इतने बडे़ राजकीय अस्पताल के हालात तो यह है कि यहां पर काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी मास्क तक उपलब्ध नहीं है। वहीं इस बीमारी का संदीग्ध पाए जाने पर उसका नमूना लेकर उदयपुर में जांच के लिए भेजा रहा है।
इस बीमारी से पीडि़त अब तक कुल 13 लोग पाए गए है, जिनमें से अब तक पांच की मौत हो चूकी है। एकबार सर्वे करने के बाद वापस नहीं आए : स्वाइनफ्लू का रोगी मिलने पर चिकित्सा विभाग आनन फानन में उस जगह की सर्वे कराकर रोगी के आस पडौस में रहने वाले लोगों में टेमी फ्लू की दवा वितरित करवाता है। लेकिन उसके बाद चिकित्सा विभाग की टीम एक बार भी उस क्षेत्र में वापस जाकर वहां के लोगों की सुध नहीं ले रहा है। वहीं इतनी भयानक बीमारी का सर्वे भी चिकित्सको के बजाय एएनएम और एलएसवी से करवाई जा रही है।
^पीएमओ सावागड़ा में आइसोलेशन वार्ड (कोटेज) बना रखा है। संदीग्ध मरीज को वार्ड में भर्ती किया जाता है। अभी अस्पताल में जांच की सुविधा नहीं है, लेकिन नमूने लेकर बाहर भेजे जा रहे है। टेमी फ्लू की दवा उपलब्ध है। -डॉ. गौरव पाठक, बीसीएमएचओ सागवाड़ा
इनको बचाएं
सबसेज्यादा 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को सावधानी रखनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, 5 साल से कम उम्र के बच्चे रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हुई हो तो सावधानी रखनी चाहिए।
कौनले सकता है टेमीफ्लू
अगरकिसी को सर्दी-जुकाम हो गया है और अगर तीन-चार दिन से दवाइयां लेने के पश्चात भी उसकी बीमारी ठीक नहीं हो रही है तो उसे डॉक्टर के परामर्श के बाद ही टेमी फ्लू टेबलेट लेनी चाहिए।
आमजन यह बरतें एहतियात
{शहरमें स्वाइन के असर को देख छात्र-शिक्षक भी मास्क पहनकर स्कूल जाएं।
{जब परिवार का कोई सदस्य संक्रमित हो तो उसे अनिवार्य तौर पर घर के एक कमरे में अन्य लोगों से अलग रखें।
{घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, दिन में कई बार हाथ धोएं।
{रोगी की सेवा करने वाले सावधानी बरतें। मुंह पर टाइट सर्जिकल मास्क लगाएं। मरीज के कपड़ों को गर्म पानी में धोएं।
^इलाज करते समय खुद का बचाव करते हुए काम करते हैं। अपनी अपनी तकलीफ बताते समय रोगी का मुंह डॉक्टर की ओर ही होता है। ऐसे में मास्क पहनकर रखते हैं। सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार की समस्या होने पर लोगों को तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। खासकर महिलाओं को सावधानी बरतनी चाहिए। श्वास में तकलीफ पर विशेष ध्यान देना चाहिए। -डॉ.सतीश श्रीमाली, स्त्रीरोगविशेषज्ञ , डूंगरपुर
डूंगरपुर में इलाज करा रही है बांसवाड़ा की एसडीएम
डूंगरपुरएसडीएम की प|ी और बांसवाड़ा एसडीएम रुकमणि रियार के भी स्वाइन फ्लू पॉजिटिव की पुष्टि हुई है। वे डूंगरपुर में अपने पति के क्वार्टर इलाज ले रही है। चिकित्सा विभाग ने स्थानीय एसडीएम सिद्वार्थ सिहाग और उनके कार्मिकों को टेमी फ्लू दी है।
सामान्य चिकत्सालय में एक रोगी के एक्सरे की जांच करते डॉक्टर।
गणेशपुर। पंचायतसमिति आसपुर अंतर्गत पाड़लाथूर पंचायत के कातरवा गांव में बीमारी का प्रकोप फैल गया है। गांव में पिछले एक पखवाड़े में 4 लोगों की मौत हो चुकी है, तो यहां के लगभग हर घर में लोग बीमार हैं। लोगों को सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी की तकलीफ है। यह लोग रामगढ़ और आसपास के अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं।
कातरवा गांव में लोगों के बीमार होने की खबर पर रामगढ़ से चिकित्सा टीमें गांव में पहुंच गई है। उपसरपंच रमेश मीणा ने बताया कि पिछले 15 दिनों में 4 लोगों की संदिग्ध रूप से बीमारी के कारण मौत हो गई है। 28 जनवरी को कातरवा निवासी शांति (40) प|ी हीरा ननोमा, 4 फरवरी को रामजी (45) पुत्र रूपजी ननोमा, 7 फरवरी को दलजी (50) पुत्र सोमा ननोमा और 8 फरवरी को देवजी (50) पुत्र हीरा ननोमा की बीमारी के कारण मौत हो गई। इन लोगों को बुखार, सर्दी-जुकाम और खांसी की शिकायत थी। इलाज भी करवाया, लेकिन आराम नहीं मिला और हालत इतनी बिगड़ी कि मौत हो गई।
कातरवा गांव के उपला फला और नीचला फला में दर्जनों लोग सर्दी-जुकाम, बुखार और खांसी से पीड़ित हैं। कातरवा निवासी लक्ष्मण पुत्र रामजी ननोमा, प्रेम प|ी कालूराम ननोमा, पुष्पा प|ी शिवराम ननोमा, हजना प|ी गौतम, तुलसी प|ी दलजी, प्रियंका रामजी, दलु पन्ना सहित गांव के घर-घर में लोग बीमार हैं। कई लोग लंबे समय से बीमार हैं और रामगढ़ अस्पताल आसपास के निजी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं, लेकिन अब तक लोगों को कोई आराम नहीं मिला है। ऐसे में गांव के लोग घरों पर ही खाट पर लेटे दवाई लेने को मजबूर हैं।
^कातरवागांव में लोगों के बीमार होने की सूचना मिली है। इस पर दो एएनएम और एक एलएचवी की टीम भेज दी है। अब तक एक बच्ची सहित तीन लोगों की मौत होने की खबर मिली है। एक व्यक्ति को खांसी की तकलीफ थी, जिससे उसकी मौत हो गई है। गांव में सर्वे कार्य चल रहा है। बीमार लोगों को चयनित कर इलाज किया जा रहा है। डॉ.पंकज पंड्या, प्रभारी, पीएचसी रामगढ़
हैल्थ रिपोर्टर | डूंगरपुर
जिलेमें स्वाइन फ्लू से अब तक 5 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 18 लोग स्वाइन फ्लू पॉजिटिव मिले हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े अभी 3 ही मौत बता रहे हैं। अब भी एक के बाद एक स्वाइन फ्लू के मामले सामने रहे हैं। डॉक्टर मरीजों की सेहत को सुधारने के लिए खुद मास्क लगाकर इलाज कर रहे हैं। जयपुर के एसएमएस अस्पताल में 3 डॉक्टरों के स्वाइन फ्लू पीड़ित होने के बाद स्थानीय डॉक्टर भी अलर्ट हो चले हैं और कहते हैं कि वे मरीजों के इलाज को ही प्राथमिकता देने में लगे हैं।
श्रीहरिदेव जोशी राजकीय अस्पताल में डॉक्टरों के साथ पूरा स्टाफ मास्क लगाए हुए ही नजर आता है। आउटडोर में सुबह होते ही मरीजों की लाइन लग जाती है। डॉक्टर स्टाफ सावधानियां बरतने के लिए लोगों को भी सलाह देते हैं। उनका कहना है कि स्वाइन फ्लू से लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। डॉक्टर को दिखाएं और सावधानी रखना ही जरूरी है। सीएमएचओ डॉ. राजाराम मीणा ने बताया कि जयपुर मुख्यालय से अब तक स्वाइन फ्लू पॉजिटिव आए लोगों की जानकारी दी गई है। जिसमें स्वाइन फ्लू को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
डॉक्टरभी हुए अलर्ट
^रोजाना100 से ज्यादा मरीज रहे हैं। सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार से लोग परेशान हैं। कई बार स्वाइन फ्लू संदिग्ध भी हो सकता है। खुद मुंह पर मास्क लगाकर मरीजों का इलाज करते है और सावधानी भी बरतते है। लोगों भी सावधानी रखने और भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचने की सलाह दी जाती है। -डॉ.राजेश सरैया, फिजिशियन