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पटवारी बनने 9776 ने भाग्य आजमाया

5 वर्ष पहले
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पटवारीभर्ती परीक्षा शनिवार को डूंगरपुर और सागवाड़ा शहर के 35 केंद्रों पर दोपहर 12 बजे हुई। परीक्षा के लिए 10700 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे, जिसमें से 9776 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। जिले में परीक्षा का प्रतिशत 91.36 प्रतिशत रहा।

परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का सुबह 10 बजे से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचना शुरु हो गए थे। सभी परीक्षार्थी बांसवाड़ा जिले के होने से अधिकांश सभी शनिवार सुबह ही डूंगरपुर पहुंचे। डूंगरपुर शहर के 19 और सागवाड़ा शहर में 16 परीक्षा केंद्रों पर विधिवत परीक्षा शुरू हुई। परीक्षा में गणित के पेपर को लेकर थोडी बहुत परेशानी हुई। वही सामान्य ज्ञान के प्रश्नों की सरलता रही। दोवड़ा प्रधान सत्या बरंडा ने बांसवाड़ा के परीक्षा केंद्र में प्री पटवारी परीक्षा दी।

परीक्षा को लेकर बांसवाड़ा से अभ्यर्थी यहां पर आए थे। जिसके कारण बांसवाड़ा डिपों की बसों में सुबह से ही भीड़ रही। वही स्थानीय डिपो की ओर से सुबह जल्दी आने वाली बसों में भीड़ रही। इसी प्रकार यहां के अभ्यर्थियों को गढ़ी, घोटाल, पालोदा का केंद्र आने से सुबह जल्द बांसवाड़ा और साबला रुट पर यात्री भार रहा। यही हाल दोपहर को परीक्षा खत्म होने के बाद का रहा। रोडवेज बस स्टैंड पर दोपहर 3 बजे से 5 बजे तक अच्छी खासी भीड़ रही। परीक्षार्थी बांसवाड़ा रुट पर जाने के लिए बसों का इंतजार करते रहे। आधे से अधिक अभ्यर्थी अपने निजी वाहनो, दुपहिया वाहनों से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे।

परीक्षा केंद्रों से दोपहर 3 बजे पेपर खत्म होने के कारण सारा ट्रेफिक लोड नए बस स्टैंड, शास्त्री मार्ग, रेती स्टैंड और बाईपास मार्ग पर रहा। जहां पर छोटे-बड़े वाहनों की लम्बी लाइन रही। जिसके कारण राहगीरों और वाहनधारकों को काफी परेशानी हुई।

चीखली.चिखलीग्रामपंचायत के मेडिटेम्बा गांव से परीक्षार्थी दुपहिया वाहनों को नाव में लादकर संगमेश्वर से माही नदी को पार कर बांसवाड़ा के आनंदपुरी पहुंचे। वहां से अपने निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे। इस नाव के कारण परीक्षार्थियों को 100 किलोमीटर की दूरी कम तय करनी पड़ी।

सागवाड़ा. जिलेमें शनिवार को हुई पटवार परीक्षा के लिए वीक्षकों को दिए गए मानदेय को लेकर शिक्षक संघ सियाराम शिक्षक संघ राष्ट्रीय के पदाधिकारियों ने असंतोष जताया है। सियाराम के जिलाध्यक्ष सुभाषचंद्र भट्ट ने बताया कि परीक्षा में वीक्षकों को काफी कम मानदेय दिया गया है। उन्होंने बताया कि 7 फरवरी को हुई रीट की परीक्षा में वीक्षकों को एक ड्यूटी पर 950 रुपए तथा दो ड्यूटी पर 1350 रुपए मानदेय दिया गया था। जबकि पटवार परीक्षा में वीक्षकों को मात्र 250 रुपए ही दिए गए। इससे बड़ी विसंगति यह है कि परीक्षा केंद्र में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को वीक्षक से 50 प्रतिशत अधिक मानदेय दिया गया है। जिलाध्यक्ष ने समान कार्य के लिए समान एवं पद की गरिमा के अनुसार मानदेय देने की मांग की है। वहीं, शिक्षक संघ राष्ट्रीय के जिला उपाध्यक्ष अरविंद कुमार भट्ट ने भी परीक्षा में वीक्षकों के मानदेय को लेकर नाराजगी जताई है।

डूंगरपुर. परीक्षा खत्म होने के साथ ही रोडवेज बस स्टैंड के बाहर लगी वाहनों की भीड़।

डूंगरपुर. पटवार भर्ती परीक्षा होने के बाद रोडवेज परिसर में बांसवाड़ा टिकट खिड़की के बाहर जमा भीड़।

डूंगरपुर. शहर के महारावल स्कूल परीक्षा केंद्र से परीक्षा देकर बाहर आते अभ्यर्थी।

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