सागवाड़ा. नगरके जैन बोर्डिंग वात्सल्य सभागार में शनिवार को आचार्य
सागवाड़ा. नगरके जैन बोर्डिंग वात्सल्य सभागार में शनिवार को आचार्य रयणसागर महाराज की धर्मसभा हुई। आचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का भोग हर हाल में भोगना ही पड़ता है।
विभिन्न योनियों में कर्म बंधन का भोग करने के बाद मनुष्य का जन्म मिलता है। जिसमें मनुष्य पाप और पुण्य का बंध करता है। जैसा कर्म वह करता है वैसा ही प्रतिफल पाता है। आज के युग में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का नाम लेना सभी पसंद करते हैं पर रावण का नाम लेना कोई पसंद नहीं करता। श्रीराम ने पुण्य के बंध से बंधे होने के कारण अच्छे कर्म किए पर रावण में पिछले जन्म का कुछ पाप का बंध था, जिसे भोगना पड़ा। कर्म तो भगवान को भी नहीं छोड़ते। आचार्य ने पाप और पुण्य की विवेचना करते हुए पाप से दूर रहकर पुण्य अर्जित करने की बात कही। इससे पूर्व प्रतिष्ठाचार्य विनोद पगारिया ने मंगलाचरण किया। इस दौरान कई श्रद्धालु मौजूद थे।
जोकरेगा वहीं भोगेगा-मुनिश्री
परतापुर.मुनिश्रीपूज्य सागरजी ने आंजना दिगंबर जैन मंदिर में कहा की दुनिया गोल है, जहां से अपनी यात्रा प्रारम्भ करता है, वहीं पर वापस जाता है। व्यक्ति धर्म कार्य करते समय बहानेबाजी करते हैं और कहते हंै कि यह काम है वह काम है और पुण्य के कार्य करने से बच जाते हैं। व्यक्ति जिसके लिए धर्म कार्य छोड़ देता है,उसे अगर पूछे की क्या इनके पाप कर्म का थोड़ा उदय आप ले सकते है तो कहने में आएगा की जिसने किया है वह ही उसका फल भोगे। इसलिए तुम दूसरों के लिए अपना धर्म का कार्य छोड़े। भगवान का अभिषेक और शांतिधार समाजबंधओं ने की।