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जमीन देने वालों ने मुआवजे के लिए रोक दिया रेलवे का काम

5 वर्ष पहले
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मसला : 0से 17 किमी तक का काम भी नहीं हो पा रहा पूरा, अधिकारियों को ग्रामीणों ने समझाइश के दौरान कहा-अब नहीं मानेंगे किसी की बात।

हकीकत: 5साल में 17 किमी तक का काम भी पूरा इसलिए नहीं हो पाया कि 20 प्रतिशत मुआवजा 23 करोड़ 23 लाख रुपए बांटना बाकी है।

तैयारी: रेलवे17 से 24 किमी तक के कार्य के लिए करीब 53 करोड़ के टेंडर देना चाह रहा है। भूमि अवाप्ति के लिए 6 करोड़ 55 लाख नहीं मिले

देरी: डूंगरपुरसे रतलाम तक की भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया हो चुकी है। भूमि अवाप्ति के लिए रेलवे को करीब 80 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।

रेलवे के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) राकेश सेरसिया को अपनी व्यथा बताता किसान।

भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर

कांग्रेसराज में शुरू हुई डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम (192 किमी) रेल लाइन का काम ग्रामीणों ने रोक दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें 2 साल से मुआवजा नहीं मिला है। जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, काम शुरू नहीं होने देंगे। काम रोकने की सूचना पर उपमुख्य अभियंता (निर्माण) राकेश सेरसिया के साथ रेलवे अधिकारियों ने आकर ग्रामीणों से समझाइश के प्रयास किए।

ग्रामीणों का कहना था कि 2 साल से मुआवजा देने की बात कह रहे हैं, एक रुपया नहीं मिला है। हमारी जमीन चली गई, मकान, खेती, पेड़, कुएं कुछ भी हमारे पास नहीं है। समय पर मुआवजा मिलता तो कहीं ओर जमीन खरीद लेते, लेकिन अब तो आसपास की जमीन भी महंगी हो चुकी है। अब जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा, काम शुरू नहीं होने देंगे। इधर, राज्य सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते यह रेल लाइन अपने तय समय से दूर हो रही है। 0 से 17 17 से 24किमी और उससे आगे की भूमि अवाप्ति के लिए सरकार से करीब 80 करोड़ रुपए मांगें हैं, जो अभी तक नहीं मिले हैं। इधर, रेलवे की ओर से तैयारी पूरी है। 0 से 17 डूंगरपुर तहसील क्षेत्र का क्षेत्र है। जहां काम जगह-जगह अधूरा पड़ा है। 17 से 24 और उससे आगे की तो भूमि अवाप्ति ही नहीं हो पाई है। इसके बाद सागवाड़ा से गढ़ी का क्षेत्र आता है।

जानकारी के अनुसार 0 से 17 किमी तक शुरुआती प्रथम चरण का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। इसी तरह 17 से 24 किमी तक के कार्य के लिए रेलवे ने 52 करोड़ रुपए खर्च कर अर्थवर्क, पिचिंग सरीखे काम करने का टेंडर तैयार कर लिया, भूमि अवाप्ति के लिए 6 करोड़ 55 लाख रुपए नहीं मिल रहे हैं।

भाजपासरकार नहीं चाहती यहां रेल चले

^भाजपासरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि नहीं चाहते कि यह रेल चले। डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन को लेकर कुछ काम हुआ, कांग्रेस राज में ही हुआ। यदि कांग्रेस की सरकार होती तो यह प्रोजेक्ट अपने तय समय में पूरा हो जाता। जब तक कांग्रेस की सरकार थी तो काम चल रहा था, लेकिन सरकार बदलने के बाद काम ठप हो गया है। यह रेल लाइन चलती है तो इसका सीधा फायदा स्थानीय लोगों को ही मिलेगा लेकिन भाजपा यहां का विकास चाहती ही नहीं है। -ताराचंदभगोरा, पूर्व सांसद

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