- Hindi News
- संबलन अभियान:स्कूलों की जांच में गड़बड़ी
संबलन अभियान:स्कूलों की जांच में गड़बड़ी
सरकारीस्कूलों के पढ़ाई का स्तर और फिजिकली स्ट्रक्चर जांचने के लिए शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहा संबलन अभियान खानापूर्ति साबित हो रहा है। शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों की सुविधा को देखते हुए उन्हीं स्कूलों में भेज रहे हैं। जिनकी पहले जांच हो चुकी है। जिससे कि विभाग अपनी कमियों को आसानी से छुपा सके ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि निरीक्षण में प्रशासनिक अधिकारियों को भी ज्यादा परेशानी नहीं होगी और शिक्षा विभाग के कार्मिकों का भी काम आसान हो जाएगा।
^सूची बनाते समय कुछ गड़बड़ी हो सकती है। कल ही सूची को बदल देते हैं। एक बार जांच कर ली स्कूल की दोबारा जांच नहीं हो सकती। अगर ऐसा कही हुआ है तो अभी संबंधित आरपी से स्पष्टीकरण मांगते है। \\\'\\\' -करुणाशंकर जोशी, एडीपीसीसर्व शिक्षा अभियान डूंगरपुर
1900 से अधिक की जांच बाकी
शिक्षाविभाग की ओर से दो वर्ष से अभियान को चलाया जा रहा है। ऐसे में प्रत्येक वर्ष करीब 250 से 300 स्कूले चैंक की जाती है। इस हिसाब से दो वर्ष में करीब 600 स्कूलें चैक हुई। जिले के करीबन 2500 स्कूल हैं। जिसमें से 1900 स्कूलों की अभी तक कोई चेकिंग नहीं हुई है।
यह है संबलन अभियान
सर्वशिक्षा अभियान के माध्यम से वर्ष 2012-13 से संबलन अभियान पूरे राज्य में चलाया जा रहा है। इस अभियान को एक शैक्षणिक वर्ष में तीन बार चलाते है। इस अभियान में प्रशासनिक अधिकारी तथा शिक्षा से जुडे सभी अधिकारी सरकारी स्कूलों को जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करते है। इसी रिपोर्ट के आधार पर शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों की योजना तैयार करती है। ऐसे में शिक्षा विभाग के अधिकारी अपनी कमियों को छुपाने और प्रशासनिक अधिकारियों को सुविधा देने के लिए जानबूझकर जांची गई स्कूलों का चयन कर रहे है। कुछ मामले इस वर्ष के संबलन अभियान में सामने आए है।
जिस स्कूल का निरीक्षण हुआ उसकी पुन: जांच नहीं होती
संबलनअभियान में प्रशासनिक शिक्षा अधिकारियों को प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों की जांच करनी पड़ती है। एक शैक्षणिक सत्र में तीन बार स्कूलों की जांच करना अनिवार्य है। एक बार सरकारी स्कूल की जांच के बाद उस स्कूल की पुन: जांच नहीं की जाती।
यह है नियम
केस 2 : प्राथमिक स्कूल अमृतिया
आसपुरके उपखंड अधिकारी सत्यनारायण आचार्य को इस वर्ष राप्रावि अमृतिया और राउप्रावि बालिका कतिसौर का