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सूरजगांव को पंचायत नहीं बनाने पर करेंगे आंदोलन
दीवड़ाछोटा के राजस्व गांव सूरजगांव को पंचायत पुनर्गठन में पंचायत मुख्यालय नहीं बनाए जाने को लेकर ग्रामीणों ने सोमवार को सामूहिक बैठक कर धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम और आमरण अनशन करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही भाजपा के स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भाजपा जिला अध्यक्ष को त्याग पत्र भी सौंपे।
उल्लेखनीय है कि पंचायत पुनर्गठन में दीवड़ा छोटा के राजस्व गांव लीमड़ी को पंचायत बनाने को लेकर और सूरजगांव को पंचायत नहीं बनाकर नवगठित लीमड़ी पंचायत का राजस्व गांव बनाने के विरोध में सूरजगांव के ग्रामीणों की बैठक की। इसमें संघर्ष समिति का गठित की गई और चरण बद्ध आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा ग्रामीणों ग्रामीणों ने आरोप लगाए कि पंचायत पुनर्गठन के नियमानुसार सूरजगांव नई पंचायत बनने के समस्त मानदंड पूरा करता है। इस कारण ही जिला कलेक्टर द्वारा किए गए प्रारूप प्रकाशन में सूरजगांव को नई पंचायत प्रस्तावित किया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि बाद में भाजपा के जनप्रतिनिधियों के दबाव में प्रशासन ने इसमें परिवर्तन कर दिया। जिसमें लीमड़ी को पंचायत बनाया गया और नियमानुसार नए प्रस्ताव को गांव में चस्पा भी नहीं किया गया। ग्रामीणों में इसे लेकर रोष है कि राजनैतिक आधार पर लीमड़ी को पंचायत बनाकर सूरजगांव को वंचित रखा गया। बैठक के बाद ग्रामीणों ने पंचायतराज मंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को और विधायक अनीता कटारा को आंदोलन का ज्ञापन दिया। ग्रामीणों ने पंचायतीराज के मुख्य शासन सचिव, जिला कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और पुलिस अधीक्षक को भी ज्ञापन भेजे।
सेामवार को हुई बैठक के दौरान संघर्ष समिति गठित की गई। इसमें अध्यक्ष नानुराम सरपोटा को बनाया गया और सदस्य में देवीलाल मोड़ पटेल, राजेश पटेल, हीरालाल डोडिंयार, पन्नालाल डोडियार, तुलसीराम चौबीसा, रघुनाथ सुथार, धुला रोत, वीरजी डामोर, शंकर कटारा, वरसेंग डोडियार, कुरीया गायरी कचरा बुनकर को बनाया गया।
ये बनी संघर्ष समिति
सूरजगांव को पंचायत मुख्यालय नहीं बनाए जाने के विरोध में भाजपा के बूथ संयोजक राजेश कलाल, बूथ सदस्य और कार्यकर्ता नानूराम, वेला रोत, हीरालाल डोडियार, गुलाब डोडियार, शंकरलाल कटारा ने भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश पाटीदार को अपने त्याग पत्र सौंपे।
इन भाजपाईयों ने दिए त्याग पत्र
ग्रामीणों द्वारा किए जाए वाले चरणबद्ध आंदोलन में 24 सितंबर तक ग्रामी