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मंजूर जगह छोड़कर बनाया जा रहा पंचायत समिति पुस्तकालय भवन
नगरवासियोंके लिए राजकीय महिपाल उच्च माध्यमिक विद्यालय में वर्षों से संचालित सार्वजनिक पुस्तकालय के लिए स्वीकृत हुए भवन को पुनर्वास कॉलोनी स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में बनवाए जाने का मामला प्रकाश में आया है। भाषा एवं पुस्तकालय विभाग के आदेश में विद्यालय के नाम में महिपाल शब्द नहीं होने से भवन निर्माण नगर के महिपाल उमावि में नहीं करवाया जाकर पुनर्वास कॉलोनी में करवाया जा रहा है।
पुस्तकालय भवन को लेकर बजट की स्वीकृति के बाद भी लंबे समय तक निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं होने पर जब महिपाल विद्यालय प्रशासन ने भाषा एवं पुस्तकालय विभाग जयपुर से संपर्क किया तो जानकारी मिली कि भवन का कार्य प्रारंभ हो चुका है। भवन का कार्य महिपाल विद्यालय के स्थान पर पुनर्वास कॉलोनी स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में चल रहा है। जबकि, विभाग के आदेशानुसार पूर्व में संचालित पुस्तकालय भवन का ही निर्माण करना था। लेकिन सर्वशिक्षा विभाग ने आदेश में महिपाल उच्च माध्यमिक सागवाड़ा के स्थान पर उच्च माध्यमिक विद्यालय सागवाड़ा लिखा होने से स्थान में परिवर्तन कर दिया और यह भी नहीं देखा कि आदेश में पुनर्वास कॉलोनी सागवाड़ा नहीं लिखा हुआ है। वहीं, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पुनर्वास कॉलोनी सागवाड़ा के पास भी उनके विद्यालय के नाम का आदेश नहीं होने के बाद भी विद्यालय परिसर में जगह उपलब्ध करवा दी गई। नगर और पंचायत समिति के लोगों को पुस्तकालय का लाभ दिए जाने के लिए बनने वाले इस पुस्तकालय के नगर से दो किमी दूर होने से लाभ नहीं मिल पाएगा।
चार दिन पहले ही मिल पाई जानकारी
^पहलेसे ही महिपाल विद्यालय में सार्वजनिक पंचायत समिति पुस्तकालय संचालित हो रहा है। अब तक की समस्त पत्रावली भी महिपाल विद्यालय में ही आई है। मुझे चार दिन पहले ही भवन पुनर्वास कॉलोनी में बनने की जानकारी मिली है।\\\'\\\'- हेमेंद्रकुमार उपाध्याय, प्रधानाचार्यराजकीय महिपाल उमावि
बाद में निकलवाई महिपाल स्कूल की स्वीकृति
^सागवाड़ामें पुस्तकालय भवन बनाने की जानकारी थी इसलिए पुनर्वास कॉलोनी में भवन बनवाया गया, लेकिन बाद में तकनीकी स्वीकृति महिपाल विद्यालय की निकलवाई।\\\'\\\' -रमेशपाटीदार, कनिष्ठअभियंता सर्वशिक्षा अभियान
पुस्तकालय का लाभ नगरवासी अवकाश के दिनों में ले रहे हैं। बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने पुस्तकालयों के विकास के लिए बजट आवंटित किय