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रोडवेज बस जाती नहीं, निजी वाहनों में सफर करना मजबूरी

7 वर्ष पहले
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क्षेत्रमें गोरेश्वर मार्ग, भासौर, बनकोड़ा, पूंजपुर मार्ग पर रोडवेज बस सेवा का अभाव है ऐसे में यहां के ग्रामीणों के लिए लोकल वाहनों में खतरों भरा सफर करना मजबूरी बनी हुई है। जिसके चलते इन मार्गो पर ओवरलोड की समस्या आए दिन देखने मिलती है।

यहां के सैकड़ों लोगों को तहसील मुख्यालय और जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए कई दिक्कतें आती है। इन रुटों पर पड़ने वालें गांवों से विद्यार्थी और कामकाजी लोग हर रोज पढ़ाई, कोचिंग और नौकरी धंधों के लिए उपखंड मुख्यालय सागवाड़ा आते है। वाहनों की कमी होने से इन्हें लटककर या वाहनों के ऊपर बैठकर सफर करना पड़ता है। पूर्ववर्ती अशोक गहलोत की सरकार ने दिसंबर 2012 में राज्य में सभी ग्राम पंचायतों को तहसील जिला मुख्यालयों से जोड़ने के लिए ग्रामीण परिवहन बस सेवा की शुरुआत की थी। जिसमें सरकार का मुख्य उद्धेश्य ग्रामीण लोगों को नौकरी, पढ़ाई करने या किसी अन्य काम से प्रति दिन निजी बसों या वाहनों सहारा लेना पड़ता हैं, उन्हें राहत देने के लिए निजी बस ऑपरेटरों के साथ मिलकर ग्रामीण परिवहन बस सेवा मुहैया कराई थी। लेकिन क्षेत्र में आज भी कई ग्राम पंचायतें ऐसी है जो इस योजना से वंचित रह गई। जिससे यहां के ग्रामीणों को आए दिन आवागमन में कई सारी दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। सागवाड़ा रोडवेज के स्थान प्रभारी प्रवीणसिंह ने बताया कि जिन रूटों पर पर्याप्त यात्री नहीं मिल रहे थे, ऐसी जगहों पर रोडवेज के मुख्य प्रबंधक के आदेशानुसार ग्रामीण परिवहन बस सेवा को बंद कर दिया। वहीं, वर्तमान में इस योजना में नया तो कोई अनुबंध किया है और ना ही बसों की संख्या में वृद्धि की गई है। अभी जो ग्रामीण परिवहन बस सेवा संचालित हो रही है वो डूंगरपुर से रतनपुर, सीमलवाड़ा, डूंगरपुर से बांसवाड़ा मार्ग पर ही चलाई जा रही है। ग्रामीण परिवहन बस सेवा को पुन: चालू करवाने के लिए प्रयासरत है।

रोडवेज की ग्रामीण बस का फाइल फोटो