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आराधना से होती है कर्मों की निर्जला : आचार्य

4 वर्ष पहले
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सागवाड़ा में सत्संग का हुआ आयोजन

भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर

उपाध्यायमुनि पीयूष विजयजी महाराज ने कहा कि जिनेश्वर भगवान की आराधना से ही हमारे पाप कर्मों का नाश होगा और तभी हमें मुक्ति का मार्ग मिल सकेगा।

महाराजश्री ने यह बात श्री जैन श्वेताम्बर वीसा पोरवाड संघ डूंगरपुर की ओर से ओटा स्थित नेमीनाथ मंदिर में चल रहे पंचाह्निका महोत्सव के तीसरे दिन श्री सिद्धचक्र महापूजन के तहत उपस्थित धर्मप्रेमियों से की। उन्होंने कहा कि आराधना अंत:करण से होनी चाहिए, तभी हमें उसका फल प्राप्त होता है। ऐसे में चातुर्मास के चार माह धर्म आराधना के सर्वश्रेष्ठ दिन है और तप और जप के माध्यम से हमें अपने मन में बसे विकारों पर विजय पाने के लिए सतत प्रयास करने चाहिए।

मुनिश्री ने कहा कि ऐसे महोत्सवों के माध्यम से कर्मों की निर्जला होती है और हमारे धर्म मार्ग का उदय होता है। उन्होंने सिद्धचक्र महापूजन की व्याख्या करते हुए उसके गुणों पर प्रकाश डाला। श्री सिद्धचक्र महापूजन के तहत लाभार्थी परिवार तेजकरण अंबालाल परिवार के अमिताभ मेहता, सिद्धार्थ मेहता तथा रौनक मेहता के सानिध्य में सिद्धचक्र महापूजन की विविध धार्मिक क्रियाओं को विधिकारक अनिल हरण के सानिध्य में मधुर स्वर लहरियों के बीच संगीतकार गोपाल एंड पार्टी ने धर्म आराधना में जब गीतों को पिरोया तो उपस्थिता धर्मप्रेमी झूम उठे। महापूजन के अवसर पर 108 दीपक की आरती भी लाभार्थी परिवार द्वारा की गई। इस अवसर पर श्रीसंघ महिला मंडल के सदस्य उपस्थित थे। इधर, उपाध्याय मुनि की निश्रा में चल रहे 26 दिवसीय संतीकर्मतप के तहत विविध धार्मिक क्रियाओं का भी आयोजन किया जा रहा है।

सागवाड़ा. पुनर्वास कॉलोनी में भजनों की प्रस्तुति देते मंडल के सदस्य।

पंचान्हिका महोत्सव के तहत सिद्धचक्र महापूजन में भाग लेते एवं श्रीजी की आरती उतारते लाभार्थी परिवार धर्मप्रेमी।

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