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घूंघट से निकलकर महिलाओं ने थामी गांवों की बागडोर
{पचास फीसदी से ज्यादा चुनी गई महिला सरपंच
{जिला प्रमुख से लेकर 10 प्रधानों के पदों पर भी महिलाओं का कब्जा
भास्करन्यूज | बाड़मेर
प्रदेशमें पंचायतीराज संस्थाओं में महिलाओं के लिए पचास फीसदी आरक्षण लागू करने से गांवों के शासन में महिलाओं का खासा दबदबा दिखाई दिया। अधिकांश पंचायतों की बागडोर महिलाओं के हाथ में है। जिला प्रमुख से लेकर प्रधान, सरपंच और वार्ड पंच पदों पर पर भी पचास फीसदी आरक्षण से अधिक महिलाएं है। घूंघट की आड़ से निकल कर महिलाओं ने गांवों के प्रशासन में अपना सिक्का जमाया। महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल कायम की है। महिला प्रधानों में अधिकांश युवा है। जिनकी उम्र महज 22 से 38 साल है। शिक्षा की अनिवार्यता का नियम लागू होने से पहली बार पंचायत चुनावों में युवा, शिक्षित और जोशीली टीम चुनी गई।
जिला प्रमुख चुनाव में ही नहीं पंचायती राज संस्थाओं के अन्य पदों पर भी महिलाओं ने आरक्षित सीटों से ज्यादा चुनाव जीत कर बाजी मारी। इनमें कई दिग्गज नेताओं की बहु रिश्तेदारों ने चुनाव जीता तो कई पहली बार चुनाव में उतरी और प्रधान भी बन गई। इस बार जब नव निर्वाचित ग्राम पंचायतों की पहली बैठक होगी तो संभव है कि माहौल कुछ बदला सा नजर आए। अधिकांश ग्राम पंचायतों की विशेषता होगी युवा सरपंच और वह भी पढ़ा लिखा। जी हां, पंचायती राज चुनावों में इस बार शिक्षा का नियम लागू कर देने से ग्राम पंचायतों की तस्वीर बदलती नजर रही है। इतना ही इसमें पचास फीसदी से अधिक महिला सरपंच है। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में युवा सरपंच चुनकर आए हैं। जो शिक्षित भी हैं। कुछ की उम्र तो 25 साल से भी कम है जबकि 30 साल से कम उम्र वाले सरपंच कई हैं। ऐसे में यकीनन इस बार गांवों से बदलाव की शुरुआत हो सकती है।
शिव प्रधान स्वरुप कंवर
उम्र 22 साल और 12वीं पास।
समदड़ी प्रधान पिंकी चौधरी 38 वर्ष और 10 वीं पास।
पद कुल संख्या महिलाएं
प्रधान17 10
जिप सदस्य 37 20
पंस. सदस्य 369 186
सरपंच 489 253
जिप सदस्यों में 20 महिलाएं
जिलापरिषद में 20 महिलाएं चुनी गई है। इनमें जीतू कंवर की उम्र महज 21 वर्ष है। जबकि ज्यादा उम्र में विजयलक्ष्मी है, जिनकी उम्र 53 साल है।
शिक्षा की अनिवार्यता से आया बदलाव
ग्रामीणोंकी माने तो सरकार के शिक्षा की अनिवार्यता के नियम से चुनाव के बाद यह सबसे बड़ा बदलाव आया है। अन्यथा सरपंच के चुनावों में युवाओं को मौका मिल पाना इतना आसान नहीं था। बहरहाल, ग्रामीण यह भी मानते हैं कि इससे एक नई शुरुआत हुई है। वहीं नवनिर्वाचित सरपंचों का भी कहना है कि वे अपने युवा होने और शिक्षा का पूरा फायदा गांवों के विकास के लिए देंगे।
17में से 10 महिला प्रधान
जिलेकी 17 पंचायत समितियों में 10 पंचायत समितियों में महिला प्रधानों का कब्जा है। बाड़मेर में पुष्पा चौधरी, गुडामालानी में मुकंदरा कंवर, सिवाना में गरिमा राजपुरोहित, रामसर में मेहरा समेजा, समदड़ी में पिंकी चौधरी, पाटोदी में रसीदा बानो, बायतु में गेरो देवी, सिणधरी में जसी देवी, शिव से स्वरुप कंवर धनाऊ से भगवती प्रधान बनी है। जबकि आरक्षण की व्यवस्था से 8 महिला सीट है। इसी तरह उप प्रधानों में आरक्षण की व्यवस्था सामान्य होने के बावजूद 6 महिलाएं चुनकर आई है।
शिक्षा की अनिवार्यता से आया बदलाव
ग्रामीणोंकी माने तो सरकार के शिक्षा की अनिवार्यता के नियम से चुनाव के बाद यह सबसे बड़ा बदलाव आया है। अन्यथा सरपंच के चुनावों में युवाओं को मौका मिल पाना इतना आसान नहीं था। बहरहाल, ग्रामीण यह भी मानते हैं कि इससे एक नई शुरुआत हुई है। वहीं नवनिर्वाचित सरपंचों का भी कहना है कि वे अपने युवा होने और शिक्षा का पूरा फायदा गांवों के विकास के लिए देंगे।
17में से 10 महिला प्रधान
जिलेकी 17 पंचायत समितियों में 10 पंचायत समितियों में महिला प्रधानों का कब्जा है। बाड़मेर में पुष्पा चौधरी, गुडामालानी में मुकंदरा कंवर, सिवाना में गरिमा राजपुरोहित, रामसर में मेहरा समेजा, समदड़ी में पिंकी चौधरी, पाटोदी में रसीदा बानो, बायतु में गेरो देवी, सिणधरी में जसी देवी, शिव से स्वरुप कंवर धनाऊ से भगवती प्रधान बनी है। जबकि आरक्षण की व्यवस्था से 8 महिला सीट है। इसी तरह उप प्रधानों में आरक्षण की व्यवस्था सामान्य होने के बावजूद 6 महिलाएं चुनकर आई है।