पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • माइनर की देखरेख में करोड़ों खर्च फिर भी टूट रही हैं वितरिकाएं

माइनर की देखरेख में करोड़ों खर्च फिर भी टूट रही हैं वितरिकाएं

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
नर्मदानहर परियोजना के तहत प्रत्येक रबी की सीजन में नर्मदा विभाग के अधिकारी पेट्रोलिंग देखरेख के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रहे हैं, लेकिन नर्मदा नहर की विभिन्न वितरिकाएं माइनर बार बार टूट रहे हैं। ऐसे में उन करोड़ों रुपए के खर्च करने पर सवालिया निशान लगे हुए हैं। माइनर वितरिका की देखरेख के नाम पर रबी की सीजन में विभाग बड़ी रकम का टेंडर ठेकेदार के नाम जारी करता है। जिसमें ठेकेदार को प्रत्येक छह किमी की परिधि में तीन आदमी लगाने होते हैं जो बारी बारी ड्यूटी देते हैं। इतनी सुरक्षा देखरेख के बावजूद बार बार टूट रही वितरिकाएं नर्मदा विभाग के अधिकारियों ठेकेदार की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं। जहां वितरिका टूटती है उस जगह पर किसानों की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ टूटी वितरिका के आगे पानी नहीं जाने से खेतों में खड़ी फसल बिना पानी के जल जाती है। हर बार टूट रही वितरिकाओं में नर्मदा विभाग के अधिकारी खुद को ठेकेदार को बचाने के लिए किसानों पर नहर में कट्टे डालकर तोड़ने का आरोप लगा देते हैं। जबकि विभाग के पास नहर में कट्टे डालने वालों का नाम तक नहीं होता ही ठेकेदार के कार्मिकों को पता होता है कि वितरिका में कितना पानी चल रहा है।ं ग्रामीणों ने बताया कि पेट्रोलिंग ठेकेदार विभाग के अधिकारी केवल कागजों में करोड़ों खर्च करते हैं तथा कागजी खानापूर्ति के लिए ही आदमी लगाए जाते हैं,हकीकत में वहां आदमी होते ही नहीं हैं। आदमियों के अभाव में विभिन्न माइनरों वितरिकाओं में क्षमता से ज्यादा पानी भर जाने की जानकारी लिफ्ट केनाल पर नहीं पहुंच पाती

यदि समय पर लिफ्ट कैनाल पर वितरिकाओं में चल रहे पानी की जानकारी पहुंचती है तो माइनर वितरिका के टूटने की नोबत नहीं आती।

नहर के गेट बंद करने से टूटती हैं वितरिका

^माइनरवितरिका के बार बार टूटने का कारण किसान हैं। कई बार ज्यादा पानी लेने के लिए किसान नहर के गेट को बंद कर देते हैं। जिसके कारण वितरिका माइनरें टूट जाती हैं। तेजारामचौधरी, एक्सईएन,खंड पांच, नर्मदा विभाग सांचौर

डूंगरी. गतदिनों डूंगरी बी माइनर के क्षतिग्रस्त होने के बाद खुद के स्तर पर किसानों की ओर से इसकी मरम्मत कराई गई। भास्कर

किसानों को मिल रही सजा

नर्मदानहर की वितरिका माइनरें टूटने की सजा आम किसानों को भुगतनी पड़ रही है। पिछले तीन साल में दर्जनों जगहों पर नर्मदा नहर की वितरिका माइनरें टूटी ओर उसके आसपास में किसानों की हजारों हेक्टेयर जमीन पर रबी की फसल बर्बाद हुई है। बार बार नर्मदा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से टूट रही वितरिका माइनरों का खामियाजा आम किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सन 2012 में अगड़ावा गांव के पास में अचानक क्षमता से ज्यादा पानी आने के कारण भीमगुड़ा वितरिका की मुख्य कैनाल टूटी थी उस समय करीब 200 बीघा जमीन पर खड़ी रबी की फसल जलमग्न हो गई थी। घटना के बाद उपखंड के आलाअधिकारी जनप्रतिनिधियों ने घटनास्थल का दौरा किया तो किसानों ने बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा देने की मांग की थी। जिसपर सभी ने राज्य सरकार से मुआवजा दिलवाने की बात कह ग्रामीणों के विरोध को शांत किया था। ठीक उसके एक साल बाद चिमड़वास गांव के पास में वितरिका टूटी ओर सैकड़ों बीघा जमीन में खड़ी फसल बर्बाद हुई लेकिन किसानों को अभी तक कुछ भी नहीं मिला।

नर्मदा नहर परियोजना के अंतर्गत आनी वाली माइनरों में किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ नहर टूटने से फसलें बर्बाद हो जाती है वहीं दूसरी ओर टूटे माइनर के निर्माण का जिम्मा भी किसानों के गले होता है। इस रबी की सीजन में करीब बारह बार माइनर वितरिकाएं टूटी है तथा हर बार माइनर का निर्माण किसानों ने चंदे से करवाया। विभाग के अधिकारी पहले किसानों से सहयोग मांग कर ठीक करवाने का वादा करते हैं जब किसान जनसहयोग से कार्य शुरु करते है तो उस कार्य के खत्म होने तक बहाने बनाने के बाद वादे से मुकर जाते हैं। डूंगरी बी माइनर के मामले में भी ऐसे ही हुआ। सहायक अभियंता भुवनेश माथुर ने पहले वादा किया तथा सामान देने का आश्वासन दिया। किसानों ने जैसे ही कार्य शुरु किया तो अपने वादे से मुकर गए।

केस 4

पनोरियावितरिका से निकलने वाली डूंगरी बी माइनर पिछले दो महिनों में तीन बार टूट चुकी है। प्रत्येक बार टूटी माइनर का निर्माण ग्रामीणों ने अपने स्तर पर करवाया पिछले गुरुवार की रात को डूंगरी बी माइनर टूटा था। ग्रामीणों ने नर्मदा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया तो सहायक अभियंता भुवनेश माथुर ने ग्रामीणों को अर्थवर्क करवाने को कहा ओर सीमेंट सहित अन्य सामान देने का वादा किया। ग्रामीणों ने अर्थ वर्क का कार्य कर तीन दिन तक फोन किए लेकिन फोन का जवाब तक नहीं दिया। उसके बाद माइनर की निर्माण सामग्री देने में असमर्थता जता दी।

केस 3

नर्मदापरियोजना की पनोरिया वितरिका की मुख्य केनाल खाभराई गांव के पास में टूट गई। जिसके कारण आगे के गांवों को समय पर पानी नहीं मिल पाया।

केस 2

रबीकी वर्तमान सीजन में चुनावों से कुछ दिन पहले भीमगुड़ा वितरिका कलजी की बेरी के पास ज्यादा पानी की वजह से टूट गई। वितरिका को ठीक करवाने में किसानों को काफी पसीना बहाना पड़ा। ग्रामीणों के लगातार बढ़ते दबाव के कारण पांच दिन बाद विभाग ने ग्रामीणों की मदद से निर्माण करवाकर पानी शुरु किया था। इस वितरिका का भी रबी की सीजन में देखरेख का टेंडर जारी किया हुआ है।

केस 1

नर्मदानहर परियोजना की मुख्य केनाल से आगे भीमगुड़ा वितरिका दिसंबर 2012 में क्षमता से ज्यादा पानी आने की वजह से टूटी। जिसके कारण वितरिका के आसपास के करीब 200 बीघा जमीन जलमग्न हो गई। इस जमीन में बोई किसानों की रबी की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी। उस समय भी नर्मदा विभाग ने लाखों रुपए का टेंडर देखरेख के लिए जारी किया हुआ था।