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महोत्सव में प्रभु जन्म महोत्सव प्रसंग का जीवंत मंचन किया
अंजनश्लाका महोत्सव के तहत श्री पाश्र्वनाथ जन्मकल्याणक महाविधान पूज्य दीक्षादानेश्री श्रीसूरीश्वरजी महाराजसा भक्ति योगाचार्य श्री यशोविजय सूरीश्वरजी महाराजसा आदि सात आचार्य भगवंतों की शुभनिश्रा में उल्लास के साथ संपन्न हुआ। शनिवार को प्रभु के जन्म प्रसंग का जीवंट मंचन किया गया जिसमें वाराणसी के महाराजा श्री अश्वसेन महारानी वामादेवी के घर खुशियों उल्लास का माहौल था। वामादेवी ने मध्यरात्रि को जब श्री पाश्र्वकुमार को जन्म दिया तब सातों नरक में उजाला हुआ तथा विश्व के सभी जीवों को शांति का अनुभव हुआ 56 दिक कुमारिकाओं ने पंखी लेकर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति देते हुए सूतिकर्म महोत्सव मनाया। वहीं इंद्र का सिंहासन डोलायमान होने के साथ इंद्र ने पंचरूप धारण कर असंख्य देव देवियों के साथ मेरूपर्वत पर एक करोड़ 60 लाख कलशों से भक्तिमय होकर जन्माभिषेक किया। जिसके अनुकरण को लेकर प्रत्येक जैन मंदिर में स्नान महोत्सव का आयोजन किया जाता हंै। पूज्य गुरूदेव श्री गुणरच्सूरीश्वरजी महाराजसा ने बताया कि परमात्मा का जन्म विश्व के कल्याण के लिए होता है। जब प्रभु का जन्म होता है तब सातों ग्रह उच्च के होते हंै। दुष्काल भी सुकाल होने के साथ आनंद व्याप्त हो जाता है। प्रभु का जन्म जीवमात्र को अजन्मा बनने के लिए होता है। जिन जनमीया शुभलग्ने गीत की पंक्तिएं एवं इच्छुक जन्मे राजदुल्हारेज्ज के गीत ने सब को नाचने के लिए मजबूर कर दिया।
आचार्य यशोविजयसूरिजी ने बताया कि अपने हृदय में प्रभु जन्मे इसलिए यह सारी भक्ति है। इस प्रसंग पर आचार्य श्री गुणर|सूरिजी, आचार्य यशोविजयसूरिजी, आचार्य पुण्यर|सूरिजी मार्गदर्शक आचार्य श्री रश्मिर|सूरिजी ने बताया कि रविवार को मनुष्यलोक में प्रभु का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, महाराजा अश्वसेन को प्रियंवृदा परमात्मा के जन्म की बधाई देगी। भुआ एवं भुआरोसा का आगमन के बाद पारणा झुलाया जाएगा। प्रभु का नामकरण विघान होगा तथा माता पिता की ओर से प्रभु को पाठशाला गमन विधान करवाया जाएगा यह सारी कृत्य परमात्मामय बनाने के लिए किए जाते हैं। संघवी शांतिलाल ने बताया कि वाराणसी नगरी मे विराट प्रर्दशन नगरी बनाई गई हंै, जिसमें परमात्मावाणी के श्रवण से जीवन परिवर्तन की ऐतिहासिक घटनाओं को जीवंत किया गया है। अहमदाबाद के जैलोट इवेट गुरू की ओर से नशा मुक्ति, सप्त व्यसन मुक्ति, कैंसर के राजदरबार में नशा करने वालों की दशा का चित्रण किया गया हैं। सांचौर के दीक्षितों की गाथा,अष्ट प्रकारी पूजा के मॉडल्स, संयंम जहाज, 14 प्रकार के श्रोता, मेरूशिखर पंढारे के चलचित्र, शत्रुंजय पहाड़, ग्रामीण संस्कृति दर्शाई गई हैं। अहमदाबाद की नाटक मंडली की ओर से तीन नाटिकाओं 1. क्या मैं भूल गया संस्कारों को 2. मानवता का मर्म तथा संयमी जीवन जैसी नाटिकाओं का मंचन किया जा रहा हैं।
सांचौर में अंजनश्लाका महोत्सव के तहत कार्यक्रम