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जल संसाधन मंत्री से मिले सांसद, माही परियोजना शुरू करने की मांग उठाई

7 वर्ष पहले
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जालोर-सिरोही सांसद देवजी पटेल ने शुक्रवार को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान सांसद देवजी पटेल ने जल संसाधन मंत्री से संसदीय क्षेत्र जालोर-सिरोही में पेयजल की उचित व्यवस्था करवाने एवं प्रस्तावित माही परियोजन को शुरू करवाने के बारे में विस्तृत चर्चा की।

सांसद ने कहा कि माही नदी का पानी राजस्थान प्रदेश के जालोर सिरोही सहित बाड़मेर जिलों को सुलभ कराने की महत्वकांक्षी योजना 25 सालों से कागजो में दफन है। ऐसे में आमजन के साथ ही भूमिपुत्रों की उम्मीदें भी टूटने लगी हैं। दरअसल, वर्ष 1966 में राजस्थान गुजरात सरकार के बीच हुए समझौते के अनरूप माही परियोजना की कयावाद शुरू हुई थी। इसके बाद गुजरात सरकार ने राज्य को पानी की आवश्कता का हवाला देते हुए पानी देने से मना कर दिया था। बाद में समझौता कमेटी के जरिए इस योजना पर सहमति बनाने के प्रयास किए गए। वर्ष 1988 में आखिर बार इस योजना पर मंथन भी किया गया। मगर लंबे समय से यह परियोजना कागजों में दबी पड़ी हैं। सांसद पटेल ने बताया कि परियोजना के तहत बांसवाडा जिले से सुरंग बनाकर जालोर, सिरोही बाडमेर जिलों के अनेक गांवों को माही नदी से पानी दिया जाना था। परियोजना को माही क्रॉसिंग पर अनास पिकवियर चैनल के जरिए डूंगरपुर जिले के टिमरूआ गांव के पास माही नदी से शुरू कर जालोर जिले के बागोडा उपखंड के बिशाला गांव तक प्रस्तावित किया गया था। योजना से समांतर 5.94 लाख एवं 7.11 लाख एकड़ भूमि को लिफ्ट से सिचिंत किया जाना था। माही बजाज परियोजना की खोसला कमेटी एवं राजस्थान-गुजरात समझौते के अनुसार पानी की मात्रा 40 टीएमसी थी। निष्पादित अनुबंध के अनुसार गुजरात राज्य से राजस्थान में उपयोग के लिए सहमति प्राप्त करने एवं इस जल उपयोग के माही बेसिन मास्टर प्लान का कार्य राज्य सरकार स्तर पर नेशनल वाटर डवलपमेंट एजेंसी नई दिल्ली को आवंटित किया हुआ है। सांसद पटेल ने बताया कि जालोर-सिरोही जिलों में कम वर्षा के चलते एवं गिरते भू-जल स्तर से पूरा क्षेत्र डार्कजोन घोषित किया जा चुका है। निरन्तर गिरते भू-जल स्तर के स्थाई समाधन क्षेत्र को हरा-भरा बनाने के लिए माही बांध की वर्षों पुरानी प्रस्तावित योजना को मूर्त रूप देने की आवश्यकता हैं। उन्होने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि संसदीय क्षेत्र की समस्या को देखते हुए पेयजल