पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • ओवरफ्लो से बह रहा पानी

ओवरफ्लो से बह रहा पानी

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{54 किलोमीटर है रतौड़ा वितरिका की लंबाई

{करीब 15 गांवों तक नहीं पहुंच रहा सिंचाई के लिए पानी

{37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र इस पूरी केनाल से होता है सिंचित

भास्कर न्यूज . सांचौर

सांचौर क्षेत्र में रतौड़ा वितरिका से जुड़े किसानों को पानी मुहैया नहीं होने से फसलें की सिंचाई नहीं हो पा रही है, जबकि दूसरी तरफ ओवरफ्लो में पानी छोड़ा जा रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वितरिका की टेल तक पानी पहुंच चुका है, लेकिन उनका यह दावा हकीकत से कोसों दूर है। अभी तक इस वितरिका से जुड़े करीब 15 गांवों तक सिंचाई के लिए पानी नहीं पहुंच पाया है, जिससे किसान परेशान है।

जानकारी के अनुसार नवंबर माह में नर्मदा विभाग द्वारा 22 लाख रुपए की निविदाएं रतौड़ा वितरिका की देख-रेख हेड रेग्यूलेशन के लिए जारी की थी। जिसके बाद ठेकेदार ने कार्य आदेश जारी होने के बाद नहर पर निगरानी के लिए कोई कार्मिक तक नियुक्त नहीं किया। यही कारण रहा कि वितरिका के टेल तक अभी तक पानी नहीं पहुंच पाया है। समस्या के बाद किसानों द्वारा उपखंड मुख्यालय पर धरना भी दिया गया, जिसके बाद प्रशासन ने समस्या समाधान का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया है। यही नहीं रतौड़ा वितरिका से जुड़ी माइनर और सब माइनरों में तो अभी तक एक भी बार पानी तक नहीं पहुंच पाया है। समस्या के बारे में अधिकारियों से बात करने पर वे भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

एकतरफ डूबा क्षेत्र और दूसरी ओर नहर सूखी

नर्मदानहर से 51 किलोमीटर से निकलने वाला लूणी एस्केप से रोजाना सैकड़ों क्यूसेक पानी व्यर्थ बहाया जा रहा है, जिससे नेहड़ के कई गांवों का संपर्क कट रहा है। दूसरी तरफ सिंचिंत क्षेत्र को पानी नसीब नहीं हो रहा, जिससे फसलों को नुकसान की संभावना है। खास बात यह है कि नर्मदा विभाग के रतौड़ा माईनर में पूर्व के दो साल तक किसानों ने सिचाई की गई, लेकिन इस बार दिसंबर माह पूर्ण होने को आया हैं लेकिन किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं।

37हजार हैक्टेयर में होनी है सिंचाई

रतौड़ावितरिका की लंबाई 54 किलोमीटर है और इसमें पर्याप्त पानी की सप्लाई होने पर यह इस क्षेत्र में 37 हजार हैक्टेयर भूमि को सिंचित करती है। लेकिन इस बार पानी नहीं पहुंचने से यह सिंचित क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।



इस बार रिड़का, खेजड़ीया