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महाराजा पार्श्व कुमार का दीक्षा कल्याणक वरघोड़ा निकला

6 वर्ष पहले
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श्रीपाश्र्व शांतिधाम तीर्थ में मूलनायक शंखेश्वर पाश्र्वनाथ, श्री महावीर स्वामी, श्री सीमधरस्वामी की अंजनश्लाका प्रतिष्ठा के पांचवें दिन भगवान पार्श्वनाथ के दीक्षा कल्याणक वर्षीदान को लेकर वरघोड़ा निकाला गया। वरघोडे़ में सबसे आगे शरणाई इंद्र ध्वज, डोरेमोन, छोटाभीम के चरित्र के साथ हाथी, घोड़ा ऊंटों के काफिले के साथ झांकियां शामिल थी। वरघोड़े में परमात्मा का रथ पूज्य साधु-साध्वी भगवंत के साथ एक सरीखी वेशभूषा पहनी श्रावक-श्राविकाएं चल रही थी। वरघोड़े में मोरमंडली आदिवासी नृत्य, पंजाब का भांगड़ा नृत्य करते हुए वरघोड़ा वाराणसी नगरी पहुंचा। यहां धर्म सभा का आयोजन हुआ। इसके साथ ही हेलिकॉप्टर से सभा स्थल पर पुष्पवर्षा की गई। पूज्य आचार्य श्री गुणर|सूरीजी आचार्य राजशंखेवरसूरी, आचार्य यशोविजयसूरी, आचार्य पुश्पर|सूरी, आचार्य भाग्यशसूरी, आचार्य यशेर|सूरी ने आचार्य, रविर|सूरिजी आचार्य, रश्मिर|सूरीजी आदि सात आचार्य भगवंत पंन्यास ,वैराग्यर|विजय, पंन्यास, जयरूर|नि धर्मर|विजय आदि 150 साधु-साध्वी भगवतों की उपस्थिति में मंच पर दीक्षा कल्याणक विधान हुआ। आचार्य गुणर|सूरि ने केशलोचन विधान करते हुए कहा राजा अश्वसेन पुत्र पार्श्व राजा संसार में 30 साल तक वास कर एक साल तक प्रतिदिन 1 करोड़ 8 लाख सोने की मोहरों का वर्षीदान कर जगत में दरिद्रता को दूर किया और संयम पथ अंगीकार किया। आचार्य रश्मिर|सूरीने बताया कि संसार इसलिए विरागी आत्मा इस अवसर पर दिल्ली के उद्योगपति मंडार निवासी मुमुक्षु भंवरलाल दोसी का वाराणसी नगरी में बहुमान किया गया। मुमुक्षु पारसमल मुमुक्षु क्रिश जयंतीलाल का भी संघवी मिश्रीमल घमंडीराम परिवार ने बहुमान किया। अहमदाबाद के जैलोट इवेंट ग्रुप की ओर से नशा मुक्ति, सप्त व्यसन मुक्ति, कैंसर के राजदरबार में व्यसनियों की दशा का चित्रण दर्शाया गया। सांचौर के दीक्षितों की गाथा, अष्ट प्रकारी पूजा के मॉडल्स, संयम जहाज, 14 प्रकार के श्रोता, मेरूशिखर पंढारे के चलचित्र, शत्रुंजय पहाड़, ग्रामीण संस्कृति को भी चित्रित किया गया। अहमदाबाद की नाटक मंडली की ओर से क्या मैं भूल गया संस्कारों को, मानवता का मर्म तथा संयमी जीवन विषय पर नाटिका का मंचन किया गया।

सांचौर. पार्श्व शांतिनाथ प्रतिष्ठा महोत्सव में कार्यक्रम के दौरान मौजूद जैन मुनि।