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गोशालाओं में तैयार होंगे आयुर्वेदिक उत्पाद दवाइयां, लगेंगे प्रोजेक्ट
प्रदेश की करीब 250 गोशालाओं का किया गया चयन, लगाए जाएंगे प्रोजेक्ट
भास्करन्यूज | जालोर
गोवंशके सरंक्षण और इसकी उपयोगिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य की विभिन्न गोशालाओं में आयुर्वेदिक उत्पाद दवाइयां तैयार की जाएंगी। इसके लिए सरकार ने प्रदेश की 250 गोशालाओं को चयन किया है। जहां इसके लिए प्रोजेक्ट लगेंगे। ऐसी गोशालाओं को केंद्र सरकार की एक योजना के तहत अनुदान मिलेगा और लोन की सुविधा भी दी जाएगी। इनमें गोमूत्र, दूध, घी गोबर से से उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इस योजना से केवल गोवंश के सरंक्षण को बढ़ावा मिलेगा बल्कि गोशालाएं भी आत्मनिर्भर हो सकेंगी। सरकार के निर्देश पर गोसेवा विभाग ने इसका प्लान तैयार कर लिया है। इसके लिए आयुर्वेदिक यूनिवर्सिटी जोधपुर पशुपालन विश्वविद्यालय बीकानेर के साथ एमओयू किया गया है। इसके बाद पूरी प्रक्रिया को इसी महीने आगे बढ़ाया जाएगा। चयनित गोशाला संचालकों को संबंधित प्रोडक्ट के लिए अगले महीने एक सप्ताह का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बनाए जाते हैं अनेक उत्पाद
जिलेके पथमेड़ा गोधाम सांचौर की ओर से अब भी अनेक गो उत्पाद बनाए जाते हैं। जिनके लिए इन गोशालाओं में प्लांट लगे हैं। यह गो उत्पाद केवल सस्ते हैं बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होते हैं। इनमें हाल ही में कागज का उत्पादन भी शुरु किया गया है। जिसके जरिए थैली, शादी के कार्ड और अन्य सामग्री तैयार की जा सकती है। इसी प्रकार गो दूध से बने पेड़े भी काफी पसंद किए जाते हैं।
चारे का उत्पादन भी बढ़ाया जाएगा
योजनाके तहत सरकार की ओर से गोशालाओं के अधीन बंजर भूमि में चारे की पैदावार भी बढ़ाई जाएगी। इसके लि प्रत्ये गोशाला में काश्त लायक जमीन का चयन कर हरे चारे के लिए अजोला घास की खेती करवाई जाएगी। इन दोनों ही कार्यों से गोशालाओं की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगी। साथ ही उनके सामने चारे की कमी का संकट भी दूर हो सकेगा।
इस योजना के तहत गोशालाओं में गोबर.गोमूत्र से वर्मी कंपोस्ट,साबुन, अगरबत्ती, औषधी, शैम्पू और कागज उद्योग लगेंगे। इसके साथ ही घी दूध के लिए लघु प्लांट लगाए जाएंगे। दूध को फिल्टर होने के बाद दूध दवाओं में उपयोग किया जाएगा। दवा बनाने के लिए भी प्लांट लगाएं जाएंगे।
अच्छीहै योजना
^गोवंशके सरंक्षण के उद्देश्य से यह योजना अच्छी है। इससे गोशालाओं को भ