नहीं उतर रही कारों से काली फिल्म
रणथंभौरनेशनल पार्क में आने वाले देशी विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा को देखते हुए भले ही आईबी द्वारा अलर्ट किया गया है, लेकिन जिला मुख्यालय पर इन दिनों काले शीशे लगे चौपहिया वाहन सरपट दौड़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद वाहनों के शीशों पर लगी काली फिल्में नहीं हट रही हैं।
वाहनों के शीशों पर काली फिल्में चढ़ी होने से बाहर से कार के अंदर बैठे सवार नजर नहीं आने से आपराधिक प्रवृति के लोग आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के बाद पुलिस के सामने से आसानी से बच निकलते हैं।
कानूनका नहीं डर
कालीफिल्म चढ़े वाहन चालकों के खिलाफ वाहन एक्ट के तहत केवल 100 रुपए का जुर्माना किया जाता है। ऐसे में वाहन चालक मालिक इस जुर्माने की परवाह नहीं करते हैं। वैसे भी छोटे शहरों में पुलिस भी ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने में रुचि नहीं दिखाती है। ट्रैफिक पुलिस ऐसे वाहनों के चालान तो बनाती है, लेकिन वाहनों पर लगी काली फिल्में नहीं हटाती। ऐसे वाहनों पर पुलिस 100 रुपए का चालान बनाकर छोड़ देती है।
वाहनों पर किसी भी तरह की फिल्म नहीं चढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार को कोर्ट ने नोटिफिकेशन जारी किया हुआ है, लेकिन इसके बावजूद कार सहित अन्य चौपहिया वाहनों के शीशों पर काली फिल्में चढ़ी हुई है। प्रशासन की अनदेखी से ऐसे लोगों में पुलिस का डर नहीं है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो रहा है।
यहहै नियम
अधिवक्ताघनश्याम योगी ने बताया कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत इस संबंध में कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिफिकेशन जारी किया हुआ है। इसमें वाहनों पर किसी भी तरह की फिल्म नहीं लगाई जा सकती है। वाहनों के शीशे पूरी तरह पारदर्शी होने चाहिए। नियमों की अवहेलना पर जुर्माना और उस वाहन से फिल्म हटवाना जरूरी है।
1200रु में चढ़ती है फिल्म
वाहनोंके शीशों पर काली फिल्म चढ़ाने का कारोबार जिला मुख्यालय में धड़ल्ले से चल रहा है। एक वाहन पर यह फिल्म करीब 1200 रुपए में चढ़ाई जाती है। ऐसे में कोई भी कार के शीशों पर काली फिल्म चढ़वा सकता है।
कोर्टकी अवमानना
सुप्रीमकोर्ट के अनुसार कारों में किसी भी प्रकार की फिल्म नहीं चढ़ाई जा सकती है। शीशों पर पर्दे से भी कवर नहीं किया जा सकता है। शीशे पारदर्शी होने चाहिए। यह निर्णय 4 मई 2012 से प्रभावी हो चुका है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने रिव्यू पिट