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कागजों में सिमटा स्ट्रीट टु स्कूल अभियान
सवाई माधोपुर | फुटपाथी,अनाथबेसहारा बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने उनका समुचित पुनर्वास सुनिश्चित करने के उद्धेश्य को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग नई दिल्ली की ओर से शुरू किया गया स्ट्रीट टू स्कूल अभियान कागजों में सिमटकर रह गया। संबंधित विभागीय अधिकारियों की कार्य के प्रति उदासीनता के चलते आज भी सड़कों पर कई बच्चे भीख मांगते कचरा बीनते नजर आते है।
फुटपाथी, अनाथ, बेसहारा, घर से भागे हुए, बाल तस्करी सहित भीख मांगने स्कूल छोड़ चुके बच्चों को औपचारिक शिक्षा से जोड़ने आधार कार्ड तैयार करवाकर उनका समुचित पुनर्वास सुनिश्चित करने के उद्धेश्य को लेकर राष्ट्रीय बाल अधिकार सरंक्षण आयोग नई दिल्ली की ओर से स्ट्रीट टू स्कूल अभियान शुरू किया गया था। इस के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में बाल अधिकारिता निदेशक एवं सुयंक्त शासन सचिव ने 16 अक्टूबर को अधिकारियों को निर्देश दिए थे। सयुंक्त शासन सचिव के निर्देश पर 3 नवंबर को जिला मुख्यालय पर बाल अधिकारिता विभाग के संबंधित अधिकारियों ने खानापूर्ति कर इतिश्री कर ली।
इनविभागों की थी जिम्मेदारी : 4मार्च 2015 तक चलने वाले इस अभियान में शिक्षा विभाग, सर्व शिक्षा अभियान, गैर सरकारी संगठन, स्वयंसेवी संस्था, पुलिस विभाग, बाल कल्याण समिति एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग को जिम्मेदारी दी गई थी। चिन्हित बच्चों के आधार कार्ड पहचान पत्र तैयार किए जाने की जिम्मेदारी बाल गृहों की थी। सर्व शिक्षा अभियान के तहत संचालित कैंप ब्रिज कोर्स से जोड़ा जाना था। उक्त बच्चों को किताब, भोजन, कपड़े खेल सामग्री आदि की व्यवस्था भी की जानी थी। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जानी थी।
चिह्नितकर करना था पुर्नवास : अभियानके दौरान सक्रिय गैर सरकारी स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा बच्चों को चिन्हित करना था। इसके लिए ट्रैफिक चौराहों, सडकों, सार्वजनिक स्थान, पर्यटन स्थल आदि पर ऐसे बच्चों की पहचान पुर्नवास के लिए जन-जागरूकता के लिए प्रचार प्रसार करना था। बाल कल्याण समिति के आदेश से चिह्नित बच्चों को आश्रय गृह, बाल गृह, बालिका गृहों के माध्यम से भोजन, कपड़े एवं अल्पकालीन आवास की व्यवस्था की जानी थी।
^स्ट्रीटटु स्कूल अभियान के तहत बच्चों को सर्व शिक्षा अभियान से जोड़ा है। गुमशुदा बच्चों के पुनर्वास की व्यवस्था भी करते है। राजेंद्रसिंह गुर्जर, सहायक निदेशक, बाल अधिकारिता एवं जिला बाल सरंक्षण इकाई