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जैन मुिन कमलेश ने दिए प्रवचन

7 वर्ष पहले
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दुख-दर्द और पीड़ा जैसी अपनों को महसूस होती है वैसी ही प्राणी मात्र को भी होती है। दूसरों की पीड़ा महसूस होते हुए उसे दूर करने के लिये अपनी हितों की कुर्बानी देकर सर्वस्व न्योछावर को तत्पर रहने वाला मानव ही धार्मिक कहलाने का सच्चा अधिकार है। जैन मुनि कमल मुनि कमलेश ने कहा कि राजा हो या रंक, अमीर हो या गरीब सभी को दर्द एक समान होता है। राजा के सिर में दर्द होने पर तो सांत्वना देने के लिए लोगों की भीड़ जुट जाएगी लेकिन जब किसी गरीब को चोट लगती है तो उसे संभालने वाला कोई नहीं होता। दलितों के उत्थान का लक्ष्य ही हम सभी को साधकर मानवता, देश एवं संस्कृति की रक्षा करनी होगी।