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अंतरराष्ट्रीय सैक्स रैकेट का खुलासा

5 वर्ष पहले
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मासूम के किडनैपर निकले मानव तस्कर, बांग्लादेश से लड़कियां ला करते थे सप्लाई

{ सर्किट हाउस क्षेत्र में एक कोठरी में बंद दो नाबालिग की बरामदगी से सामने आया सच

{ बैंक की पर्ची से पता चला सरगना के खाते में जमा हुए 35 लाख रुपए

भंवरजांगिड़ | जोधपुर

बासनीएरिया से तीन साल की बच्ची के अपहरण के पीछे बंगाल से राजस्थान बॉर्डर तक मानव तस्करी के बड़े कारोबार का खुलासा हो रहा है। बंगाल का लक्ष्मीपुर गांव, जो एक नदी के पास और बांग्लादेश से महज 20 किमी दूर है, वहीं से पूरे देश में मासूम बच्चियों की तस्करी की जा रही है। वहां गिरोह के सरगना का साम्राज्य फैला है जो बांग्लादेश से मासूम बच्चियों की खरीद करता है, फिर सीमा पर तैनात जवानों की मिलीभगत से बॉर्डर पार करवा पहले कोलकाता लाता है। फिर उन्हें अनैतिक कार्यों में धकेलने के लिए देश भर में भेजता है।

सरगना के एक बैंक खाते में 8 माह में 35 लाख रुपए जमा हुए हैं जो जोधपुर ही नहीं, जयपुर, मुंबई, पुणे सहित गुजरात के कई शहरों से भेजे गए थे। डीसीपी ईस्ट विनीत कुमार ने बताया कि गिरोह की सभी बड़े शहरों में चेन फैली है, इसे चलाने वाले मास्टर माइंड सुजॉय बिश्वास को बांग्लादेश बॉर्डर से पकड़ कर जोधपुर ला रहे हैं। उसके बैंक खातों की छानबीन कर देश के शहरों में अनैतिक कार्याें के लिए बंधक बनाई बच्चियों को मुक्त कराने का प्रयास करेंगे।

आरोपी नंदिनी

5-7 हजार में खरीदती, 11 हजार में बॉर्डर पार कराती

भारतकी सीमा से सटे बांग्लादेश के गांवों में नंदिनी को सब जानते हैं। वह साल में 3-4 बार वहां से बच्चियां लाती है। पूछताछ में उसने बताया कि बच्चियों को 5-7 हजार में खरीद कर बॉर्डर ले आती है। यहां नाव से बंगाल के बॉर्डर लक्ष्मीपुर गांव तक नदी पार कराती है। बॉर्डर पर सुरक्षा बलों के जवानों को प्रति बच्ची 11 हजार रुपए देती है तो वे उन्हें कोलकाता जाने की अनुमति दे देते हैं।

दो-तीन साल अनैतिक काम करवा वापस बांग्लादेश छोड़ आते, एक की तो शादी भी हो चुकी

रोतीमिली दो बच्चियों को पुलिस ने नारी निकेतन भेजा तो पता चला कि वहां बांग्लादेश की दो युवतियां 2012 2014 से कस्टडी में है। इन दोनों बच्चियों से उनकी बात कराई ताकि बांग्ला भाषा में पूछताछ हो सके। उन युवतियों ने भी बताया कि नंदिनी का गिरोह ही उन्हें भी ऐसे ही जोधपुर लाया था। नारी निकेतन की युवतियों ने बताया कि उनके साथ एक और युवती थी जिससे एक साल तक देह व्यापार कराया, फिर बांग्लादेश भेज दिया। अब उसकी वहां शादी हो चुकी है। यह गिरोह बच्चियों को लाता है, कुछ साल रखने के बाद दुबारा बॉर्डर पार करवा घर भेज देता है। वे इसलिए नहीं जा पाई क्योंकि पुलिस ने उन्हें संदिग्ध हालत में घूमते हुए पकड़ लिया था।

बच्चियों को हिदायत, पकड़े जाने पर कहना कि राजीव रंजन लाया, हकीकत में वह है ही नहीं

पकड़ीगई बच्चियों को नंदिनी ने समझा रखा था कि जब भी पकड़े जाएं तो बताना कि राजीव रंजन लेकर आया है, लेकिन राजीव रंजन नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं। नंदिनी के घर की तलाशी में फर्जी आईडी और बैंक में पैसा जमा कराने की पर्चियां मिली। जिस खाते में पैसा जमा हो रहा था, वह सुजॉय बिश्वास का खाता था। इस खाते की जांच की तो इसमें पिछले 8 माह में करीब 35 लाख रुपए जमा होना पाया गया। यह पैसा जयपुर, मुंबई, पुणे आदि कई शहरों से जमा हो रहा था और विड्रा बंगाल के विभिन्न एटीएम से हो रहा है। तब एक टीम वहां भेजी गई और सुजॉय को पकड़ा गया। बिश्वास को बांग्लादेश बॉर्डर से पकड़ कर जोधपुर ला रहे हैं।

अपहरण मामले में गिरफ्तार नंदिनी रॉय भी बांग्लादेशी है, असली नाम टुम्पा पुत्री अब्दुल करीम है। उसने यहां चौहाबो एड्रैस से फर्जी आईडी बना रखी है। नंदिनी ने जोधपुर संभाग को ठिकाना बना रखा है, जोधपुर शहर का सोनू सोनी उसका साथी है। दोनों 3 माह पहले अवैध रूप से बांग्लादेश गए और 11 बच्चियां खरीद कर लाए थे। 2 को जोधपुर रखा, अन्य 9 को एजेंटों के हवाले कर अन्य शहर भेज दिया। जोधपुर में दोनों बच्चियां सर्किट हाउस के पास कोठरी से रोती मिली तो पुलिस ने बरामद किया था।

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